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मेवाड़ में आत्मघाती साबित नहीं हो जाए कांग्रेस का BAP गठबंधन प्रेम

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देवेन्द्र शर्मा, उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। लोकसभा चुनाव में बांसवाड़ा सीट पर कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेताओं, जनप्रतिधिनियों के तमाम विरोध और तर्कों को एक तरफ रखते हुए BAP यानी भारत आदिवासी पार्टी को समर्थन देने का एलान कर दिया है। बड़े चुनाव में कांग्रेस भले ही भाजपा की राह मुश्किल करने इस गठबंधन को फायदे का सौदा मान रही हो, लेकिन आने वाले समय में पंचायतीराज और निकाय चुनाव में कांग्रेस का यही गठबंधन प्रेम कहीं आत्माघाती साबित नहीं हो जाए.? स्थानीय चुनाव में राजनीतिक परिस्थितियां वैसे भी बड़े चुनावों से काफी अलग होती है।

लोकसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस ने तीसरी सीट पर अन्य पार्टी के साथ गठबंधन किया है। कांग्रेस माकपा के साथ सीकर में और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के साथ नागौर में गठबंधन कर चुकी है। हालांकि सीकर और नागौर की तुलना में मेवाड़-वागड़ में राजनीतिक परिस्थितियां और आदिवासी वोट बैंक को बांधे रखने की चुनौतियां कुछ अलग है। BAP ने बांसवाड़ा सीट पर राजकुमार रोत को चुनाव मैदान में उतारा है जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड मत से जीत हासिल की और कांग्रेस-भाजपा के समीकरण बिगाड़ दिए। विधानसभा चुनाव में मेवाड़ की कुछ अन्य सीटों पर भी बीएपी ने कांग्रेस और भाजपा को मजबूत टक्कर दी थी। यह वही BAP है जो कि BTP से टूटकर बनी है और कम समय में अपना मजबूत वोट बैंक भी तैयार कर दिखाया है।

कांग्रेस के स्थानीय नेताओं को भी सबसे बड़ा डर इस बात को लेकर सता रहा है, कि मौजूदा दौर में कांग्रेस की हालत किसी से छिपी हुई नहीं है। इसी बीच संकट के इस दौर में लोकसभा चुनाव में आदिवासी क्षेत्र बांसवाड़ा-डूंगरपुर में यदि मतदाताओं को कांग्रेस पार्टी का झंडा और उसके नेता नजर नहीं आएंगे तो कांग्रेस के वोट बैंक का ग्राफ नीचे गिरना तय है। ऐसे में आगामी पंचायतीराज चुनाव और निकाय चुनाव में उसकी भरपाई मुश्किल से होगी। इन परिस्थितियों में बीएपी का जनाधार और मजबूत होने से कांग्रेस को अगले विधानसभा चुनाव में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

लोकसभा चुनाव में बीएपी से गठबंधन की आहट शुरू होते ही कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने 26 मार्च 2024 को ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर भारत आदिवासी पार्टी से गठबंधन को लेकर खुला विरोध दर्ज करवाया था। यह तर्क भी दिया था कि इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी का चुनाव लड़ना भविष्य के लिए पार्टी हित में होगा। पत्र लिखने वालों में पार्टी के चार विधायक खैरवाड़ा से दयाराम परमार, घाटोल विधायक नानलाल निनामा, बांसवाड़ा विधायक अर्जुन बामनिया और कुशलगढ़ विधायक रमिला खड़िया के साथ ही एआईसीसी सदस्य दिनेश खोड़निया, बांसवाड़ा जिला अध्यक्ष रमेश पंड्या और डूंगरपुर जिलाध्यक्ष वल्लभराम पाटीदार शामिल थे।

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