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1993 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों का मुख्य आरोपी “टुंडा” बरी, दो आतंकियों को उम्रकैद

TADA court ajmer acquitted Abdul Karim Tunda in 1993 serial bomb blast caseTADA court ajmer acquitted Abdul Karim Tunda in 1993 serial bomb blast case

मामले में 12 आतंकवादियों को 20 साल पहले ही उम्रकैद की सजा हो चुकी है

अजमेर,(एआर लाइव न्यूज)। 1993 में देश के मुंबई, सूरत, लखनऊ, कानपुर और हैदराबाद पांच शहरों की ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के केस में आज गुरूवार को अजमेर की टाडा कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को बरी कर दिया है, वहीं दो आतंकवादी इरफान और हम्मीदुद्दीन को दोषी करार कर उम्र कैद की सजा सुनाई है। (TADA court ajmer acquitted Abdul Karim Tunda)

हालां कि टुंडा 1996 में बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वर्तमान में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। टुंडा की उम्र 80 वर्ष हो चुकी है, आतंकवादी इरफान 70 और हम्मीदुद्दीन की उम्र 44 वर्ष है। अजमेर टाडा कोर्ट के इस मामले में 31 साल बाद आए इस फैसले से कई लोगों को मायूसी हुई है। टुंडा को बरी करने के फैसले को सीबीआई सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।

अब्दुल करीम टुंडा ने 6 दिसंबर 1992 को ढहाई गयी बाबरी मस्जिद का बदला लेने के लिए ठीक एक साल बाद 6 दिसंबर 1993 को देश के पांच शहरों की ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाके किए थे। इन धमाकों में दो यात्रियों की मौत हो गयी थी, जबकि 22 से अधिक लोग घायल हुए थे। इसके बाद पूरे देश में दहशत का माहौल हो गया था।

16 आतंकवादियों को 20 साल पहले ही उम्रकैद की सजा सुना दी गयी थी

देश के पांच शहरों की ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के आरोप में उस वक्त 16 आतंकवादी गिरफ्तार हुए थे, जिन्हें टाडा कोर्ट ने 20 साल पहले 28 फरवरी 2004 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इन 16 आतंकियों में 4 को बरी कर 12 की सजा बरकरार रखी थी, ये सभी आतंकवादी जयपुर जेल में सजा काट रहे हैं। इस मामले में अब्दुल करीम टुंडा फरार चल रहा था, जो 2013 में नेपाल बॉर्डर पर पकड़ा गया था, वहीं आतंकी इरफान और हम्मीदुद्दीन भी 2004 के बाद ही पकड़े गए थे। ऐसे में टाडा कोर्ट ने इन तीनों पर लगे आरोपों की सुनवाई कर मामले में आज फैसला सुनाया है।

कई आतंकी संगठनों से जुड़ा रहा है टुंडा

अब्दुल करीम टुंडा लश्कर-ए-तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद और बब्बर खालसा सहित कई आतंकवादी संगठनों से जुड़ा रह चुका है। 1993 में ही मुंबई में हुए बम धमाकों के बाद टुंडा पहली बार एजेंसियों के जांच के दायरे में आया था। बताया जाता है कि बम बनाते समय हुए विस्फोट में ही उसने अपना एक हाथ गवां दिया था और तब से अब्दुल करीम का नाम टुंडा पड़ गया था। टुंडा को 2013 में भारत-नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया था। चार साल बाद, हरियाणा की एक अदालत ने अब्दुल करीम टुंडा को 1996 में हुए विस्फोट मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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