उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। विधानसभा चुनाव में मेवाड़ में इस बार भारत आदिवासी पार्टी (BAP) आदिवासी वोट बैंक को अपनी और खिंचने में सफल होती नजर आयी। दूसरी तरफ पिछले चुनाव में जिस भारतीय ट्राईबल पार्टी (बीटीपी) के दो विधायक बने थे वह बीटीपी इस बार के चुनाव में कमजोर होकर रह गई।
2018 के विधानसभा चुनाव में मेवाड़ में जो बीटीपी मजबूत नजर आयी,उसी बीटीपी के कई नेताओं ने अलग होकर भारत आदिवासी पार्टी बनाई। इस पार्टी ने इस बार पहले ही विधानसभा चुनाव में मेवाड़ में अपना राजनीतिक दबदबा कायम कर दिखाया। दूसरी तरफ बीटीपी की राजनीतिक ताकत इस चुनाव में बहुत ही कमजोर होकर रह गई। जबकि 2018 के चुनावी में चौरासी और सागवाड़ा में बीटीपी के विधायक बने थे। बीटीपी प्रत्याशी ने आसपुर मंे कांग्रेस की गणित ही बिगाड़ दी थी। आसपुर में कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही। खेरवाड़ा में भी बीटीपी का अच्छा प्रदर्शन रहा था हालांकि बीटीपी प्रत्याशी चुनाव जीत नहीं पाया।
रोत दूसरी बार बने विधायक, तोड़े सारे रिकॉर्ड
राजकुमार रोत जो कि पिछली बार डूंगरपुर जिले की चौरासी से बीटीपी से चुनाव लड़े और विधायक भी बने। वे इस बार बीएपी से चुनाव लड़े और बड़े अंतर से चुनाव जीतकर दोबारा विधायक भी बन गए। इस बार के चुनाव में राजकुमार रोत चौरासी से 69166 वोटों से जीते जो कि पूरे राजस्थान में दूसरी बड़ी जीत है। रोत ने चुनावी मैदान में भाजपा सरकार में मंत्री रहे सुशील कटारा और कांग्रेस के पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा को शिकस्त देकर विधायक का पद अपने नाम कर लिया। रोत को कुल 111150 वोट मिले है।
धरियावद और आसपुर में भी बीएपी के विधायक बने
आसपुर में बीएपी प्रत्याशी उमेश मीणा 28940 वोट से चुनाव जीते जबकि धरियावद में थावर चंद 6691 वोट से जीतकर विधायक बने। इन दोनों ने इन सीटों पर भाजपा और कांग्रेस की तमाम कोशिशें विफल कर दी। आदिवासी वोट बैंक को अपनी और खिंचने में बीएपी पूरी तरह से सफल रही।
बीएपी ने इन सीटों पर भी उतारे थे प्रत्याशी,उम्मीद अनुरूप मिले वोट
इस बार के विधानसभा चुनाव मंे उदयपुर ग्रामीण सीट पर बीएपी प्रत्याशी उमेश कुमार को 25172 वोट मिले। झाड़ोल में दिनेश कुमार को 44503,सलूंबर में जितेश मीणा को 51691, खेरवाड़ा में विनोद मीणा को 16189, प्रतापगढ़ में मांगीलाल मीणा को 62023, सागवाड़ा में कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही जबकि बीएपी के मोहनलाल रोत को 63176 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे। गढ़ी में बीएपी के मणिलाल गरासिया को 43525, डूंगरपुर में कांतीलाल रोत को 50285 वोट मिले। घाटोल में अशोक मीणा को 84644 वोट मिले और वे चुनावी मुकाबले में दूसरे स्थान पर रहे। कुशलगढ़ में राजेंद्र को 33758, बांसवाड़ा में हेमंत मीणा को 34666, बागीदौरा में जयकृष्ण पटेल को 60387 और बड़ी सादड़ी में बीएपी प्रत्याशी को 11833 वोट मिले। हालांकि कुछ अन्य सीटों पर भी बीएपी ने चुनाव लड़ा लेकिन वहां ज्यादा असर नहीं दिखा पायी।
मेवाड़ में इस बार बीटीपी की यह रही स्थिति
इस बार के विधानसभा चुनाव में बीटीपी प्रत्याशी डॉ.देव विजय को 4204 वोट मिले। खेरवाड़ा में बीटीपी के प्रवीण कुमार परमार ने मजबूत स्थिति बनाई और उनको 53290 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे। सलूंबर में बीटीपी प्रत्याशी प्रकाश मीणा को 1105,डूंगरपुर में डॉ.दीपक घोघरा को 1519, सागवाड़ा में मोहनलाल डिंडोर को 3242, घाटोल में धीरजमल निनामा को 1867, गढ़ी में विजय पाल को 1609 वोट मिले। बांसवाड़ा में भगवती डिंडोर को 1387,बागीदौरा में बसंतीलाल गरासिया को 8517, कुशलगढ़ में देवीचंद को 981, कुंभलगढ़ में चमन दाणा को 1843 और चौरासी में बीटीपी प्रत्याशी रामचंद तबियाड़ को 3318 वोट ही मिले। इससे साफ हो जाता है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में मेवाड़ में बीटीपी अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने में विफल रही।

