- गंदा है पर धंधा है ये : पुलिस और तस्करों का गठजोड़ का खुलासा
- जिसने पुलिस को कर्मचारी के संदिग्ध गतिविधि की सूचना दी, उसी को फंसाने में जुट गयी पुलिस
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जयपुर की टीम द्वारा ट्रेप किए गए फतहनगर थानाधिकारी सुरेशचंद मीणा और डबोक हेडकांस्टेबल महावीर प्रसाद फरार चल रहे हैं (fatehnagar sho suresh meena absconded)। लेकिन इस केस में जैसे-जैसे तथ्य सामने आ रहे हैं, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
इस केस से न सिर्फ पुलिस और तस्करों के गठजोड़ का खुलासा हो रहा है, बल्कि मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में पुलिस का ऐसा चेहरा भी बेनकाब हुआ है, जिसमें पुलिस रिश्वत के लिए आरोपी को बचाकर सूचना देने वाले को ही फंसाने में जुट जाती हो। हम यह नहीं कहते कि सभी पुलिसकर्मी भ्रष्ट होते हैं, लेकिन पुलिस का यह चेहरा आमजनता को डराने वाला साबित हो सकता है।
परिवादी को संदिग्ध गतिविधि के बारे में पुलिस को सूचना देना पड़ा भारी
परिवादी सुनील पाटिल ने एसीबी को दी रिपोर्ट में बताया है कि वह दमन-द्वीव का रहने वाला है और भोलेनाथ एंटरप्राइजेज फर्म का सुपरवाइजर है। उसकी फर्म ने उदयपुर के डबोक स्थिति शाह पॉलीमर्स फैक्ट्री का काम ले रखा है। उसकी फर्म की तरफ से हेमंत झा उदयपुर में रहकर शाह पॉलीमर्स का काम देखते हैं। एसीबी को दी रिपोर्ट में सुनील पाटिल परिवादी और हेमंत झा सहपरिवादी हैं।
एसीबी को दी रिपोर्ट में परिवादी ने बताया कि शाह पॉलीमर्स फैक्ट्री में निखिल सिंह नियमित विजिट पर आते-जाते हैं। एक दिन अगस्त 2023 में परिवादी ने शाह पॉलीमर्स फैक्ट्री के बाहर निखिल सिंह को कुछ अन्य व्यक्तियों द्वारा संदिग्ध हालात में पैकेट का लेन-देन करते देखा। फैक्ट्री में कार्यरत निखिल सिंह को संदिग्ध गतिविधि में लिप्त देखकर परिवादी ने डबोक थाने के हेडकांस्टेबल महावीर प्रसाद को मुखबरी करते हुए शिकायत की।
एसीबी एफआईआर में परिवादी ने स्पष्ट बताया कि उसकी मुखबरी पर हेडकांस्टेबल महावीर प्रसाद ने एफआईआर दर्ज की, जिसकी जांच फतहनगर थानाधिकारी सुरेशचंद मीणा कर रहे थे। लेकिन इस मामले में दोषियों को पकड़ने के बजाए पुलिस मुखबरी करने वाले हम परिवादी सुनील और हेमंत झा को परेशान करने लगी और मुकदमे में उल्टा फंसाने की धमकी देकर 8 लाख रूपए रिश्वत मांग करने लगी।
जिसकी कार से मादक पदार्थ बरामद हुआ, पुलिस ने उसे थाने से छोड़ दिया
हेडकांस्टेबल महावीर प्रसाद की भूमिका इस मामले में पहले दिन से ही संदेह के घेरे में नजर आती है और डबोक में मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में दर्ज हुई एफआईआर में जो हालात हेडकांस्टेबल महावीर प्रसाद ने बताए हैं, उससे पुलिस और तस्करों का मजबूत गठजोड़ होने का संदेह भी पैदा होता है।
डबोक में दर्ज एफआईआर के अनुसार हेडकांस्टेबल महावीर प्रसाद ने जिस कार से 458 ग्राम अफीम बरामद की, उस कार के चालक निखिल सिंह को थाने पर लाने के बाद मामूली पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। यह वही निखिल सिंह है, जिसके बारे में एसीबी के परिवादी ने पुलिस को शिकायत की थी। एसीबी के परिवादी की शिकायत और एफआईआर के हालात पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस ने निखिल सिंह को बचाने के लिए मौके के हालात से लेकर एफआईआर में बतायी कहानी में काफी बदलाव किया है।
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