जो मिला, उसे धोखा दिया : सिविल कंस्ट्रक्शन कंपनी से की 11.32 करोड़ की धोखाधड़ी
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर में एक बड़े रियल-एस्टेट प्रोजेक्ट से जुड़े भू-कारोबारी की करोड़ों की धोखाधड़ी के साथ ही उनका अजीबो-गरीब कारनामा सामने आया है, जिसमें उन्होंने न सिर्फ यूआईटी (वर्तमान में यूडीए) में फर्जी दस्तावेज लगाकर पट्टा लिया, बल्कि बैंक में फर्जी दस्तावेज लगाकर 75 करोड़ का लोन भी पास करवा लिया। खासबात रही इस ग्रुप से जो मिला वह धोखे का शिकार हुआ। (Tivona city project Titardi udaipur)
ऐसे ही एक पीड़ित मुंबई की चेजारा कंस्ट्रक्शन कंपनी के जफर चेजारा ने ब्रजेश कंस्ट्रक्शन के डायरेक्टर परिमल पारिक और नेहा पारिक सहित उदयपुर की तीन रियल एस्टेट डवलपर्स कंपनियों एक्मे सर्वोदय डवलपर्स, हीरामन डवलपर्स और एचडीएल हाउसिंग डवलपमेंट कंपनी के निदेशकों व साझेदारों सहित अन्य के खिलाफ 11 करोड़ रूपए से अधिक की धोखाधड़ी का मामला उदयपुर के सवीना थाने में दर्ज करवाया है।
ऐसे चला धोखाधड़ी का स्टेप बाय स्टेप पूरा घटनाक्रम
1. निर्माण कार्य शुरू करवाकर फर्जी पट्टे से पास करवाया 75 करोड़ का लोन
पीड़ित जफर चेजारा ने एफआईआर में बताया कि उसकी चेजारा कंस्ट्रक्शन नाम से सिविल कंस्ट्रक्शन कंपनी है और वह देशभर में प्रोजेक्ट करते हैं। 2011 में ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टर परिमल पारिक और नेहा पारिक ने जफर चेजारा से संपर्क किया और बताया कि वे उदयपुर के तीतरड़ी क्षेत्र के 4 लाख 22 हजार स्क्वॉयर फीट भूमि पर टिवोना सिटी प्रोजेक्ट ला रहे हैं। यह भूमि और इस पर बने दो बंगले ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी ने खरीद लिए हैं। यहां मल्टी स्टोरी रेजीडेंशियल बिल्डिंग एवं मॉल तथा आवासीय कॉलोनी बनाने जा रहे हैं।
परिमल पारिक ने इस प्रोजेक्ट में कंस्ट्रक्शन करने के लिए चेजारा कंस्ट्रक्शन्स के साथ इकरारनामा किया। इस पर चेजारा कंस्ट्रक्शन्स की तरफ से जफर चेजारा ने मशीने एवं स्टाफ को ब्रजेश कंस्ट्रक्शन्स के टिवोना सिटी प्रोजेक्ट लैंड पर पहुंचा दिया और नक्शे के मुताबिक कंस्ट्रक्शन का काम शुरू कर दिया। चेजारा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने वहां सैंपल हाउस और एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग का निर्माण किया। इस दौरान ब्रजेश कंस्ट्रक्शन के परिमल पारिक ने डीएचएफएल से इस प्रोजेक्ट पर 75 करोड़ तक का लोन पास करवा लिया।
2. लोन नहीं चुकाकर दिवालिया घोषित की कंपनी
शुरूआत में तो परिमल पारिक ने चेजारा को निर्माणकार्य का थोड़ा पेमेंट किया। फिर एक दिन अचानक कोई लीगल ईशू की बात कहकर परिमल पारिक ने काम बंद करवा दिया और भरोसा दिलाया कि काम जल्द शुरू होगा। इस पर जफर चेजारा स्टाफ के साथ कुछ दिनों के लिए मुंबई चए गए।
कुछ समय बाद उदयपुर लौटे तो मौके से उनकी निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली मशीनें भी ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी ने खुर्द-बुर्द कर दी थी। उस समय तक प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन में लगा चेजारा कंस्ट्रक्शन का तकरीबन 5 करोड़ 96 लाख रूपए का भुगतान बकाया था। जिसके लिए जफर चेजारा ने ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टर परिमल पारिक और नेहा पारिक को कई बार बोला, लेकिन उन्होंने भुगतान नहीं किया और हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर टालते रहे।
प्रार्थी ने एफआईआर में बताया कि वर्ष 2019 में उसे जानकारी मिली कि ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी दिवालिया घोषित हो गयी है और इसका प्रकरण नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी), मुंबई ब्रांच में चल रहा है। इस पर प्रार्थी ने भी उसके बकाया भुगतान के लिए एनसीएलटी में 59600000 रूपए मूल और 53640000 रूपए ब्याज कुल 113240000 रूपए का दावा दायर कर दिया।
3. ब्रजेश कंस्ट्रक्शन ने अन्य स्थानीय कंपनियों को बनाया धोखाधड़ी में सहयोगी
इस दावे को वापस लेने के लिए ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टरों उस पर काफी दबाव बनाया और धोखाधड़ी का एक नया फॉर्मूला लेकर आया व प्रार्थी जफर चेजारा को फिर से झांसे में ले लिया। ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टर परिमल पारिक और नेहा पारिक ने इस फर्जीवाड़े में उदयपुर की तीन बड़ी कंपनियों एक्मे सर्वोदय डवलपर्स, हीरामन डवलपर्स और एचडीएल हाउसिंग डवलपमेंट कंपनी के निदेशकों व साझेदारों को अपने साथ मिलाया।
इन सभी ने जफर चेजारा से एक समझौता किया और समझौते की शर्तों में लिखा परिवादी का भुगतान दिसंबर 2019 तक नहीं कर सके तो टिवोना सिटी प्रोजेक्ट लैंड में मेरे द्वारा बनाई गयी बिल्डिंग के पास स्थित बंगले से लगती हुई 10 हजार स्क्वॉयर फीट जमीन चेजारा कंस्ट्रक्शन्स को देंगे। समझौते के आधार पर ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशकों ने अन्य के साथ मिलीभगत कर एनसीएलटी से परिवादी का दावा खारिज करवा दिया।
4. उस जमीन को देने का इकरारनामा किया जो ब्रजेश कंस्ट्रक्शन की थी ही नहीं
समझौते के तय समय में जब प्रार्थी को उसका न तो उसका भुगतान मिला और न ही वह जमीन चेजारा कंस्ट्रक्शन के नाम की गयी। एफआईआर में परिवादी ने आरोप लगाते हुए बताया है कि इस पूरे प्रकरण के बारे में उसने जानकारी ली तो उसे पता चला कि ये पूरी जमीन ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी की नहीं है और न ही उस पर बना वो बंगला उनका है, जिसे ध्वस्त करके उस बंगले की जमीन को चेजारा कंस्ट्रक्शन्स को देने का इकरार किया था। ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी की साइट पर स्थित एक अन्य दो मंजिला हेरिटेज बंगला भी उनका नहीं है, जिसमें उन्होंने अपना साइट ऑफिस बनाया हुआ था, बल्कि ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी ने वह बंगला लीज पर लिया था।
ब्रजेश कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टरों ने इन तथ्यों को छुपाकर यूआईटी से फर्जी दस्तावेजों के जरिए फर्जी पट्टा प्राप्त किया था। फर्जी पट्टे के आधार पर भी बैंक से फर्जी तरीके से 75 करोड़ का लोन पास करवाया। बैंक सहित अन्य लोगों के पैसा हड़पने की नियत से ही ये प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। इसमें इन लोगों ने चेजारा कंस्ट्रक्शन कंपनी के भी 11 करोड़ 32 लाख रूपए हड़प लिए।
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