पिछले चुनाव में भाजपा, कांग्रेस की बढ़ाई थी मुश्किलें
देवेंद्र शर्मा,उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। पिछले विधानसभा चुनाव में मेवाड़ में आदिवासी वोट बैंक में सेंध मारने वाली भारतीय ट्राईबल पार्टी (बीटीपी) में इस बार के चुनाव से ठीक पहले बिखराव होने से हर किसी की नजर आदिवासी वोट बैंक पर टिकी हुई है (BTP role in rajasthan assembly election 2023)। बीटीपी से जुड़े नेताओं ने ही इससे अलग होकर भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) बनाई और विधानसभा चुनाव में मेवाड़ की कई सीटों पर प्रत्याशी भी उतार दिए है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में आदिवासी क्षेत्र में किसी की भी गणित बिगड़ सकती है।
पिछले विधानसभा चुनाव में आदिवासी क्षेत्र में कई जगह भाजपा और कांग्रेस को टक्कर देने वाली बीटीपी में इस बार चुनाव से पहले बिखराव होने को भाजपा और कांग्रेस अपने अपने नजरिए से खूद के लिए फायदेमंद मान रही है। बीटीपी में हुए बिखराव से खासकर भाजपा और कांग्रेस फिर से आदिवासी वोट बैंक को अपनी और खिंचने पूर जोर कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ भारतीय आदिवासी पार्टी भी दमखम लगा रही है ताकी उसकी पहले ही चुनाव में राजनीतिक ताकत नजर आ सके।
हालांकि इस बिखराव से किसको कितना राजनीतिक फायदा होगा यह तो विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद ही साफ हो पाएगा। पिछले चुनाव में अचानक उभरी और आक्रामक रूप से चुनावी मैदान में उतरी बीटीपी के कारण चुनाव परिणाम आने तक भाजपा और कांग्रेस की चिंता बढ़ी रही।
नुकसान तो बीटीपी को भी होना तय
बीटीपी से अलग होकर जिन लोगों ने भारत आदिवासी पार्टी बनाई है वे उसी क्षेत्र में सक्रियता दिखा रहे है। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में पिछले विधानसभा चुनाव में मुकाबले बीटीपी की वोटों की गणित भी गड़बड़ा सकती है।
पिछली बार दो विधायक बने थे बीटीपी के
बीटीपी ने पिछले विधानसभा चुनाव में मेवाड़ में कई सीटों पर प्रत्याशी उतारे। हालांकि सफलता डूंगरपुर जिले की चौरासी और सागवाड़ा सीट पर ही मिल पायी। इन दोनों सीटों पर बीटीपी के विधायक चुने गए। सागवाड़ा और चौरासी में कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे। चौरासी में विधायक चुने गए राजकुमार रोत को 38.22 फिसदी वोट मिले थे जबकि भाजपा प्रत्याशी को 30.51 फिसदी और कांग्रेस प्रत्याशी को 21.41 फिसदी वोट मिले। सागवाड़ा में बीटीपी के विधायक बने राम प्रसाद को 33.59 फिसदी वोट मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी को 30.95 फिसदी और कांग्रेस प्रत्याशी को 24.07 फिसदी वोट मिले थे।
आसपुर में कांग्रेस की गणित बिगाड़ दी थी
बीटीपी ने आसपुर में कांग्रेस के वोटों की गणित बिगाड़ दी। इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली लेकिन मुकाबले में बीटीपी प्रत्याशी रहा। यहां कांग्रेस प्रत्याशी राईया मीणा तीसरे नंबर पर रहा। जबकि राईया मीणा एक पुराना चेहरा था। खेरवाड़ा में बीटीपी प्रत्याशी भी टक्कर में रहा और उसे 20383 वोट मिले थे। गढ़ी में बीटीपी प्रत्याशी को 23093 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहा। हालांकि पिछले चुना में बीटीपी धरियावद, डूंगरपुर, घाटोल, बागीदौरा और कुंभलगढ़ में बड़ा राजनीतिक करिश्मा नहीं कर पायी।
दो उप चुनावों में भी बीटीपी का कमजोर प्रदर्शन रहा
2018 के विधानसभा चुनाव में भले ही बीटीपी मेवाड़ में दो विधायक बनाने में सफल रही, लेकिन तीन साल बाद ही हुए उप चुनाव में बीटीपी कमजोर साबित होती नजर आयी। मई 2021 में राजसमंद विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव में बीटीपी ने भी प्रत्याशी उतारा था, लेकिन उसे मात्र 736 वोट मिले। उसके बाद नवंबर 2021 में वल्लभनगर में हुए उप चुनाव में बीटीपी प्रत्याशी को 938 वोट मिले। ऐसे में उप चुनाव में बीटीपी कमजोर साबित हुई।
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