देवेंद्र शर्मा, उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उप महापौर पारस सिंघवी के साथ पल-पल में सेल्फियां लेने, उपरणा ओढ़ने और उनकी वाह वाही करने वाले भाजपा पार्षद, कुछ समिति अध्यक्ष और कार्यकर्ता इन दिनों सिंघवी के आसपास कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि ऐसे लोग भूमिगत से हो गए हैं। (paras singhvi udaipur bjp leader)
21 अक्टूबर को भाजपा ने शहर विधानसभा सीट से ताराचंद जैन को प्रत्याशी घोषित किया था। जैन का नाम घोषित होते ही उप महापौर पारस सिंघवी खुलकर विरोध पर उतर आए हैं। सिंघवी ने चार दिनों में विरोध बैठक भी की और शहर में स्वाभिमान रैली भी निकाली। इसमें वो लोग कहीं पर भी नजर नहीं आए जो नियमित रूप से सिंघवी के इर्द-गिर्द नजर आया ही करते थे।
उपरणा की राजनीति करने वालों ने बनाई दूरी
सिंघवी के उप महापौर बनने के बाद भाजपा के कुछ पार्षद और समिति अध्यक्ष हर दम उप महापौर कक्ष में घंटों डेरा जमाए बैठे नजर आते थे, आज वे सिंघवी के लिए भूमिगत से हो गए हैं। सिंघवी किसी कार्यक्रम में शामिल होते या निगम के कार्यक्रम में जाते, तब सेल्फियां लेने में ऐसे लोग कभी पीछे नहीं रहते। किसी का जन्म दिन हो या विवाह की वर्षगांठ, जो लोग उपरणा की राजनीति में सिंघवी के सबसे के करीब नजर आते थे, आज वो लोग सिंघवी से सबसे ज्यादा दूरी बनाकर चलते नजर आ रहे हैं।
इसी बहाने सिंघवी को भी जमीनी हकीकत नजर आयी
मौजूदा हालात ने कहीं न कहीं पारस सिंघवी को भी जमीनी हकीकत दिखा दी है। उप महापौर के रूप में सिंघवी जिन पार्षदों, समिति अध्यक्षों को सबसे ज्यादा तव्वजों देते थे, उनके लिए आज सिंघवी गौण हो गए। चलों इसी बहाने सिंघवी को भी आज जमीनी हकीकत नजर आ ही गई। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि अगर सिंघवी अब निर्दलीय भी चुनाव लड़ते हैं तो उनके तथाकथित सबसे करीबी माने जाने लोग खुलकर कितना साथ दे पाएंगे।
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