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54 दिव्यांग-निर्धन जोड़े बने जन्म-जन्म के साथी: वे बोले- कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसी भव्य शादी होगी हमारी

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उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। सामान्य परिवार के लिए बेटे-बेटी की सही जीवनसाथी ढूंढकर शादी करना काफी मुश्किल होता है, तो दिव्यांग के लिए विवाह एक सपने जैसा ही होता है। लेकिन आज रविवार को ऐसे ही 108 दिव्यांग-निर्धन युवक-युवतियों का सपना सच हुआ है और विवाह भी ऐसा भव्यता के साथ हुआ कि किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। narayan seva sansthan divyang nirdhan samuhik vivah samaroh

नारायण सेवा संस्थान की ओर से रविवार को बड़ी स्थिति संस्थान परिसर में पूरी भव्यता के साथ 54 दिव्यांग-निर्धन जोड़ों का सामूहिक विवाह समारोह हुआ। इस अनूठे विवाह समारोह में देशभर से करीब आए 1500 मेहमान साक्षी बने। यह सबकुछ देखकर वर-वधुओं और उनके परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक गए। 54 जोड़ों ने वरमाला के बाद मंडप में अग्नि को साक्षी मानकर फेरे लिए और एक-दूसरे का जन्मों-जनम तक साथ निभाने का वादा किया। विवाह स्थल पर 54 जोड़ों के विवाह के लिए 54 वेदी-अग्निकुंड मंडप सजाए गए थे।

कभी एक-दूसरे को देखा नहीं, पर प्रेम हो गया

नारायण सेवा संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि आज यहां दिव्यांग-निर्धन सामूहिक विवाह समारोह हो रहा है। इनमें ऐसे जोड़े भी शामिल हैं, जिनमें वर-वधु दोनों प्रज्ञाचक्षु है, किसी जोड़े में वधु मूक-बधिर, तो वर प्रज्ञाचक्षु, कोई एक हाथ-पैर से असमर्थ है, तो वधु ने कहा मैं सहारा बनुंगी। ऐसे ही ये दो अधूरे पुष्प एक-दूसरे को पूरा करेंगे और जीवनभर एक-दूसरे के जीवनसाथी बनकर साथ निभाएंगे।

संस्थान संस्थापक पद्मश्री अलंकृत कैलाश “मानव”, सह संस्थापिका कमला देवी, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल, ट्रस्टी निदेशक जगदीश आर्य, देवेंद्र चौबीसा, राजेंद्र कुमार, पलक अग्रवाल सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 1500 से अधिक अतिथियों व कन्या दानियों की उपस्थिति व सानिध्य में सामूहिक विवाह समारोह में आशीर्वाद, आशीर्वचन और अपनेपन की अद्वितीय झलक देखने को मिली। वीडियो में देखें सामूहिक विवाह समोराह की भव्यता और झलकियां:-

हर जोड़े पर हुई फूलों की वर्षा

प्रातः शुभ मुहूर्त में नीम की डाली से तोरण की परम्परागत रस्म का निर्वाह किया। इसके बाद भव्य पण्डाल में गाते-झूमते हजारों लोगों के बीच नव-युगल ने एक-दूसरे के गले में वरमाला डाली और तन-मन से एकाकार होने की परस्पर मौन स्वीकृति दी। इस दौरान जोड़ों पर गुलाब पुष्प की पंखुरियाँ की वर्षा होती रही। इसके बाद भव्य पाण्डाल में निर्मित 54 वेदी-अग्निकुंड पर जोड़ों का आचार्य ने वैदिक मंत्रों और विधि. विधान से विवाह संपन्न करवाया। यह संपूर्ण प्रक्रिया मुख्य आचार्य सत्यनारायण के निर्देशन में 54 सह आचार्य की टीम द्वारा संपन्न हुई।

उपहार एवं विदाई

विवाह विधि संपन्न होने पर नव-युगल को संस्थान व अतिथियों की ओर से नवगृहस्थी के लिए आवश्यक सामान एवं उपहार स्वरूप स्वर्ण व रजत आभूषण प्रदान किए गए। जिसमें मंगलसूत्र, चूड़ी, लोंग, कर्णफूल, अंगूठी, रजत पायल, बिछिया आदि शामिल थे, जब कि गृहस्थी के सामान में गैस चूल्हा, पलंग-बिस्तर, अलमारी, संदूक, बर्तन, सिलाई मशीन, पानी की टंकी आदि हैं। जोड़ों को दोपहर 2 बजे मंगल आशीर्वाद के साथ डोली में विदाई हुई तथा संस्थान के वाहनों से उनके शहर-गांव तक पहुंचाया गया।

नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक पद्मश्री कैलाश “मानव” भी विवाह समारोह में खुशी से झूम उठे

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