- राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने दी मंजूरी
- उदयपुर,अलवर, कोटा, जयपुर,जोधपुर व राज्य के एनसीआर उप क्षेत्र में अनुमति नहीं
जयपुर,( एआर लाइव न्यूज)। वाहनों की बढ़ती संख्या और टायर वेस्ट के समुचित निस्तारण की समस्या को देखते हुए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने नई टायर पायरोलिसिस इकाइयों की स्थापना और कंटीन्यूअस बैच प्रकार की मौजूदा इकाइयों के रूपांतरण को मंजूरी दी है। हालांकि ऐसी इकाइयों को गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्रों नॉन अटेन्मेंट शहर( अलवर,कोटा, जयपुर, जोधपुर और उदयपुर) और राज्य के एनसीआर उप क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाएगी।
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष शिखर अग्रवाल ने बताया कि ऐसी टायर पायरोलिसिस इकाइयों की स्थापना समय की मांग है जो प्रदूषण का कारण नहीं बनती हैं। आरएसपीसीबी ने कुछ चेतावनियों के साथ नई टायर पायरोलिसिस इकाइयों की स्थापना और कंटीन्यूअस बैच प्रकार की मौजूदा इकाइयों के रूपांतरण की अनुमति देने का निर्णय लिया है। टायर प्रसंस्करण इकाइयों में तत्काल निवेश और टायर कचरे का उचित निपटारा हो सकेगा और ईपीआर लक्ष्यों की शीघ्र प्राप्ति भी होगी। अवैध रेसाइक्लर्स पर भी नजर रखी जा सकेगी।
कंटीन्यूअस प्रकार की टायर पायरोलिसिस इकाइयों की स्थापना को दी गई मंजूरी
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव विजय एन द्वारा जारी आदेशानुसार राज्य में स्थापितएसंचालित करने की सहमति केवल निरंतर प्रकार की टायर पायरोलिसिस इकाइयों को दी जाएगीए न कि बैच प्रक्रिया पर चलने वाली इकाइयों को। बैच प्रक्रिया पर टायर पायरोलिसिस इकाइयों के संचालन और प्राधिकरण के लिए सहमति के नवीनीकरण के लिए ऐसी इकाइयों को केवल निर्दिष्ट औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर ही अनुमति दी जाएगी।
आदेश के अनुसार ऐसी इकाइयों को गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्रों, नॉन अटेन्मेंट शहर(अलवर, कोटा, जयपुर, जोधपुर और उदयपुर) और राज्य के एनसीआर उप क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाएगी। बैच प्रक्रिया पर टायर पायरोलिसिस इकाइयों के संचालन और प्राधिकरण के लिए नवीनीकरण की सहमति इस शर्त पर दी जाएगी कि इकाई को 31 दिसंबर 2025 तक कंटीन्यूअस प्रक्रिया में परिवर्तित कर दिया जाएगा।
राज्य में 2012 के बाद से ऐसी इकाइयों की स्थापना पर रोक लगा दी थी
उल्लेखनीय है कि राज्य में 2012 के बाद कंटीन्यूअस प्रकार की टायर पायरोलिसिस इकाइयों की स्थापना पर आगामी आदेशों तक प्रभावी रोक लगा दी गयी थी। जिसके पश्चात एनजीटी ने सीपीसीबी को एनईईआरआई और आईआईटी, दिल्ली की भागीदारी के साथ अध्ययन करने का निर्देश दिया थाए ताकि अध्ययन के नतीजे के आधार पर यह निर्णय लिया जा सके कि मौजूदा बैच या एडवांस बैच स्वचालित या केवल कंटीन्यूअस इकाइयों को अनुमति दी जाए या नहीं।
इसके पश्चात् एनजीटी एवं सीपीसीबी के निर्देशानुसार टायर वेस्ट के समुचित निस्तारण की समस्या एवं प्रदूषण नियंत्रण के साथ ईपीआर( एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी) को मध्यनजर रखते हुए यह निर्णय लिया गया। उक्त सम्बन्ध में विस्तृत आदेश के साथ एसओपी जारी कर दी गयी है।

