Site iconSite icon AR Live News

IPC,CrPC और एविडेंस एक्ट में नाम सहित सबकुछ बदलेगाः राजद्रोह की धारा खत्म

three new bills are set to replace IPC CrPC and Evidence act to complete overhaul of the country criminal justice systemthree new bills are set to replace IPC CrPC and Evidence act to complete overhaul of the country criminal justice system

गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीनों कानूनों के संशोधन विधेयक पेश किए

नई दिल्ली,(एआर लाइव न्यूज)। केन्द्र सरकार द्वारा अंग्रेजों के शासनकाल में बने क्रिमिनल लॉ IPC, CrPC और एवीडेंस एक्ट में आमूलचूल परिवर्तन कर नए कानूनों का संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया गया है। नए कानूनों के न सिर्फ नाम बल्कि धाराओं की संख्या और धाराओं के प्रावधान में तक बदलाव कर होंगे। तीनों विधेयकों को समीक्षा के लिए स्थायी समिति के पास भेजा गया।

जहां भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860 भारतीय न्याय संहिता 2023 के नाम से जाना जाएगा, वहीं दंड प्रकिया संहिता (CrPC) को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कहा जाएगा। साक्ष्य अधिनियम को भारतीय साक्ष्य अधिनियम कहा जाएगा। अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे इन कानूनों में कुल 313 संशोधन किए गए हैं। IPC की 511 धाराओं के बजाए, इसकी जगह आ रहे भारतीय न्याय संहिता में 356 धाराएं होंगी, इसमें कई धाराएं हटाई गयी हैं तो कुछ नयी धाराएं और प्रावधान जोड़े गए हैं।

अंग्रेजी शासनकाल में जिस राजद्रोह की धारा 124ए का सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता था, उसे नए कानून से हटा दिया है। इसके स्थान पर अब अलगाववादी गतिविधियों, सशस्त विद्रोह व देश की एकता-अखंडता को खतरे में डालने वालों के लिए नए प्रावधान जोड़े गए हैं। वहीं लवजिहाद को भी अपराध की श्रेणी में लाया गया है, जिसमें सात वर्ष या अधिक सजा का प्रावधान है। पिछले कुछ सालों से मॉब लिंचिंग के मामलों में हुई बढ़ोतरी हुई है। लोकसभा में तीनों विधेयक पेश करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र मॉब लिंचिंग के मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान लाने की योजना बना रहा है।

महिलाओं के साथ अपराध पर नया अध्याय

महिलाओं के साथ अपराध पर भारतीय न्याय संहिता में नया अध्याय जोड़ा गया है। भारतीय न्याय संहिता के अध्याय 5 में महिलाओं के साथ अपराधों के सजा के प्रावधान को शामिल किया है, अध्याय 5 में धारा 63 से 97 तक कुल 34 धाराएं हैं। शादी का झांसा देकर योन शोषण करने, पहचान छुपाकर योन शोषण करने में भी कड़ी सजा के प्रावधान किए गए हैं। नाबालिक से बलात्कार के मामले में मृत्युदंड और दुष्कर्म के मामलों में 20 साल तक सजा का प्रावधान किया गया है।

इन मामलों की 30 दिन में पूरी करनी होगी सुनवाई

तीन साल तक की सजा के मामलों में समरी ट्रायल होगी और आरोप तय होने के 30 दिन में सुनवाई पूरी करनी होगी। सात साल या अधिक जेल की सजा वाले अपराधों के सभी मामलों में फॉरेंसिक टीम का घटनास्थल पर जाना अनिवार्य होगा। पुलिस व अन्य जांच एजेंसी की सर्च और जब्ती के दौरान वीडियो रेकॉर्डिंग जरूरी। वारंट पर 30 दिन में लेना होगा फैसला।लोकसेवकों पर अभियोजन स्वीकृति के लिए समय सीमा तय, 120 दिन में फैसला नहीं किया तो मानी जाएगी डीम्ड अनुमति। किसी की संपत्तियां कोर्ट के आदेश पर ही कुर्क होंगी।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज(AR Live News)से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

Exit mobile version