- पुलिस और परिजन दोनों की कहानी अलग, तो क्या सच सामने आएगा.?
- युवति के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तय करेगी जांच की दिशा
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। गोगुंदा थाने के अंदर पुलिस हिरासत में गुरूवार शाम हुई युवक सुरेन्द्र सिंह देवड़ा की मौत और इसमें पुलिस अधिकारियों की नाकाफी कार्यवाही ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं (custodial death in udaipur rajasthan)। शुक्रवार सुबह राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना मेवाड़ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने गोगुंदा थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया। लोग केस संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच करने, पूरे थाना स्टाफ को निलंबित करने और परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग पर अड़ गए और पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया।
पूरे दिन समझाइश के बाद शाम को एसपी विकास शर्मा ने आदेश जारी कर लापरवाही बरतने पर थानेदार अनिल विश्नोई सहित केस से संबधित 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया और घटनाक्रम के समय ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। इसके बाद शाम को परिजन मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाने और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होने की बात के साथ पीएम के लिए सहमत हुए। नियमानुसार पुलिस कस्टडी में हुई मौत की न्यायिक जांच होती है, ऐसे में इस मामले की भी मजिस्ट्रेट द्वारा जांच की जाएगी।
सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्यों कि मामले में पुलिस की कहानी और परिजनों की कहानी में काफी अंतर है। जहां पुलिस 24 वर्षीय युवक को प्रथमदृष्ट्या हर्ट अटैक आने की बात कर रही है, तो वहीं परिजन पुलिस कस्टडी में युवक के साथ मारपीट होने का आरोप लगा रहे हैं। इस संबंध में परिजनों ने पुलिस अधीक्षक के नाम लिखित रिपोर्ट भी दी है।
यह हुआ था घटनाक्रम
10 दिन पहले 15 मई को गोगुंदा के देवड़ों का खेड़ा निवासी 24 वर्षीय सुरेन्द्र सिंह पुत्र उदय सिंह देवड़ा राजपूत गांव की ही मेघवाल समाज की 22 वर्षीय एक युवति को लेकर भागा था। इस पर युवति के परिजनों ने 16 मई को गोगुंदा थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाई थी। युवक और युवति के परिजन मिलकर दोनों को तलाश रहे थे। युवक परिजनों के संपर्क में था, तो काफी समझाइश के बाद युवक-युवति ने उनकी लोकेशन बताई, जिस पर 24 मई को युवक-युवति के परिजन एक साथ पुलिस को लेकर उनके पास पहुंचे। 25 मई की सुबह सभी युवक-युवति के साथ गोगुंदा थाने पहुंच गए। यहां युवति के बयान कराए गए, जिसके बाद युवति को उसके परिजनों के साथ भेज दिया गया। अब यहां से ही परिजनों और पुलिस की कहानी में अंतर आना शुरू हो जाता है।
पुलिस ने कहा युवति ने युवक के खिलाफ बयान दिए, इससे युवक आहत हुआ और उसकी तबियत बिगड़ गयी
पुलिस का कहना है कि युवति ने युवक के खिलाफ बयान दिए थे, जिससे युवक काफी आहत हुआ और वह यह बर्दाश्त नहीं कर पाया। इस दौरान अचानक उसकी तबियत बिगड़ गयी और वह बेहोश हो गया। पहले तो पुलिस ने थाने में ही उसे पानी पिलाकर होश में लाने का प्रयास किया। लेकिन जब वह होश में नहीं आया तो उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स से कहा इसकी पल्स नहीं चल रही है। गोगुंदा सीएचसी से रैफर कर युवक को एमबी हॉस्पिटल लाए, जहां उसे डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया।
परिजन बोले – युवति ने कहा वह मर्जी से गयी थी, फिर भी सुरेन्द्र को थाने में रख मारपीट की
युवक के परिजनों ने बताया कि युवक-युवति को 25 की सुबह लेकर आ गए थे। युवति ने बयान दिए थे कि वह मर्जी से सुरेन्द्र के साथ गयी थी और उस पर कोई दबाव नहीं था। पुलिस ने युवति को तो उसके परिजनों के साथ भेज दिया, लेकिन सुरेन्द्र को नहीं छोड़ा। परिजनों ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने थाने में सुरेन्द्र के साथ मारपीट की, जिससे उसकी तबियत बिगड़ गयी।तबियत बिगड़ने के बाद पुलिस उसे गोगुंदा सीएचसी ले गयी, वहां किसी परिचित ने सुरेन्द्र को देखा तो रात करीब 8 बजे परिचित ने हमें सुरेन्द्र के हॉस्पिटल में होने की जानकारी दी। पुलिस ने हमें तत्काल कोई जानकारी नहीं दी और जब उसकी मौत हो गयी, तो रात साढ़े 10 बजे पुलिस ने हमें सूचना दी कि सुरेन्द्र की हर्ट अटैक से मौत हो गयी है।
मृतक सुरेन्द्र के भाई चंदन सिंह ने बताया कि पुराने किसी एक मामले को लेकर भी थाने का एक कांस्टेबल नाराज चल रहा था। जिसके चलते सुरेन्द्र के साथ थाने में मारपीट की गयी।
पुलिस और परिजन दोनों का सच अलग, अब वाकैय सच क्या है
परिजन और पुलिस दोनों अपना-अपना सच और कहानी बता रहे हैं। युवति के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही केस की दिशा तय करेंगे और वास्तविक सच क्या है, यह तो न्यायिक जांच के बाद ही सामने आएगा। परिजन की बात पर भरोसा किया जाए तो सवाल है कि जब युवक-युवति को सुबह लेकर आ गए थे, तो युवक को पूरे दिन बिना कोई मामला दर्ज किए थाने में क्यों बैठा कर रखा। जब युवक सुरेन्द्र की तबियत खराब हुई तो तत्काल परिजनों को सूचना क्यों नहीं दी।
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