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कर्नाटक: कांग्रेस के लिए खुल गए सत्ता के फाटक

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भाजपा की उम्मीदों पर फिरा पानी

बेंगलुरू,(एआर लाइव न्यूज)। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के शनिवार को आए परिणामों में भाजपा की उम्मीदों पर पानी फिर गया, जबकि कांग्रेस के लिए कर्नाटक में सत्ता के फाटक फिर से खुल गए (karnataka assembly election result 2023)। कांग्रेस ने यहां भाजपा को सत्ता से बाहर दिया है। देश के बड़े राज्यों में शामिल कर्नाटक में सत्ता पर काबिज होने से लगातार कई राज्यों में मिली चुनावी हार से निराश कांग्रेस को संजीवनी मिली है। अब देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस की यह संजीवनी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों तक कांग्रेस का साथ दे पाएगी या नहीं। आगामी समय में राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने है।

कर्नाटक में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार कर्नाटक की 224 सीटों में कांग्रेस ने 136 सीटें जीत ली है, जबकि भाजपा ने 65 सीटों पर जीत हासील की है। जनता दल सेक्युलर ने 19 सीटें जीती हैं, कल्याण राज्य प्रगति पक्ष और सर्वोदय कर्नाटक पक्ष ने 1-1 सीट और 2 सीटें निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीती हैं। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 73.19 फिसदी वोट पड़े है, जबकि 2018 में 72.36 फिसदी वोट पड़े थे।

कर्नाटक में नफरत के बाजार बंद हुए हैं, मोहब्बत की दुकानें खुली है : राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कर्नाटक में नफरत के बाजार बंद हुए हैं, मोहब्बत की दुकानें खुली हैं। कर्नाटक चुनाव में एक तरफ क्रॉनी केपिटलिस्ट की ताकत थी, दूसरी तरफ गरीब जनता की शक्ति थी। इस शक्ति ने ताकत को हरा दिया। यहीं हर राज्य में होगा। हमने नफरत, गलत शब्दों सेे यह लड़ाई नहीं लड़ी। हमने मोहब्बत से प्यार से और दिल खोल कर लड़ाई लड़ी और कर्नाटक की जनता ने हमें बता दिया कि मोहब्बत इस देश को अच्छी लगती है। कर्नाटक की जनता से किए पांच वादें किए थे वो पहले दिन पहले कैबिनेट में पूरा करेंगे।

प्रधानमंत्री और कार्यकर्ताओं की कोशिशों के बावजूद हम लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए: बोम्मई

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने प्रेस से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री और बीजेपी के कार्यकर्ताओं की तमाम कोशिशों के बावजूद हम लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए। हम नतीजों पर गहन मंथन करेंगे और इन नतीजों को लोकसभा चुनाव में वापसी की अपनी कोशिश के तौर पर ले रहे हैं।

राजस्थान में भी पुनरावृत्ति होगी: अशोक गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि कर्नाटक ने सांप्रदायिक राजनीति को नकार कर विकास की राजनीति को चुना है। आने वाले राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना विधानसभा चुनाव में भी इसकी पुनरावृत्ति होगी।

2018 में कुछ ऐसा रहा कर्नाटक विधानसभा चुनाव

कर्नाटक में 2018 के विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था, लेकिन तब राज्यपाल ने बड़ा दल होने से भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता दिया। बीएस येदियुरप्पा तीसरी बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित नहीं होने से कुछ घंटों बाद ही उनकी सरकार गिर गई और येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई थी, लेकिन 2019 में कुमार स्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर संकट आने से बहुमत के अभाव में सरकार गिर गई। इसके बाद कर्नाटक की राजनीति में नया टर्निंग प्वांइट आ गया था।

तब भाजपा ने फिर से सत्ता पर काबिज होने की कवायद शुरू की। जुलाई 2019 में राज्यपाल ने फिर से भाजपा को सरकार बनाने का मौका दिया और बहुमत साबित कर बीएस येदियुरप्पा चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने। इसी बीच जुलाई 2021 में येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। तब भाजपा ने बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाने का तय किया और उनको मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई गई।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज(AR Live News)से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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