Site iconSite icon AR Live News

पाकिस्तानी सेना के लिए दहशत बने युद्धक टैंक टी-55 को पर्यटक अब उदयपुर में करीब से देख सकेंगे

The Governor kalraj mishra unveiled the battle tank T-55 at Pratap memorial site moti magri udaipurThe Governor kalraj mishra unveiled the battle tank T-55 at Pratap memorial site moti magri udaipur

उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर में शनिवार को मोती मगरी स्थित प्रताप स्मारक स्थल पर युद्धक टैंक टी-55 (battle tank T-55 i) का अनावरण समारोह हुआ। मुख्य अतिथि राज्यपाल कलराज मिश्र ने समारोह में टैंक टी-55 का अनावरण करते हुए 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध के दौरान टी-55 की भूमिका और विशेषताओं की जानकारी दी

शनिवार को उदयपुर दौरे पर रहे राज्यपाल कलराज मिश्र सुबह डबोक एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट से सर्किट हाउस होते हुए राज्यपाल मोती मगरी स्थित प्रताप स्मारक पहुंचे। जहां सर्वप्रथम उन्हें गार्ड ऑनर दिया गया। इसके पश्चात माननीय राज्यपाल ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। राज्यपाल ने भारतीय सेना द्वारा प्रताप स्मारक स्थल पर उपहार में प्रदत्त युद्धक टैंक टी 55 का अनावरण किया। राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में प्रताप स्मारक की स्थापना के महत्व एवं यहां टी-55 टैंक को यहां लाने पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कार्यक्रम में भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु के परिजनों का सम्मान भी किया।

पाकिस्तानी सेना के लिए दहशत बन गया था टी-55

महाराणा प्रताप स्मारक समिति अध्यक्ष लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने टैंक टी-55 की विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया कि यह टैंक भारतीय सेना के अविस्मरणीय पराक्रम और गौरवशाली गाथा का प्रतीक है। यह टैंक भारतीय सेना ने महाराणा प्रताप स्मारक समिति मोती मगरी को पुणे से उपलब्ध करवाया है। देशी-विदेशी पर्यटक मोती मगरी में इस टैंक का अवलोकन कर सकेंगे।

सेवानिवृत लेफ़्टिनेंट जनरल जे एस नैन ने टैंक टी-55 के युद्धों में योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि टी-55 टैंक का पाकिस्तानी सेना के खिलाफ 1971 के युद्ध में उपयोग हुआ था। यह टैंक अपनी क्षमता के कारण पाकिस्तानी सेना के लिए दहशत बन गया था। यह टैंक 1968 में सेना में शामिल हुआ था और 2011 तक सेवा देता रहा। 580 एचपी इंजन से लैस टैंक टी-55 रूस से निर्मित है। 37 टन वजनी होने के बावजूद तेज गति से चलने वाला बख्तरबंद लड़ाके वाहन है। इस टैंक में 4 सदस्यों का दल तैनात किया जाता है। इस टैंक की मदद से 105 एमएम की राइफल से भी लैस होकर तमाम बाधाएं पार कर सकते हैं।

पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध के अलावा इस टैंक ने 1967 के अरब इजराइल युद्ध, 1970 के जॉर्डन के गृह युद्ध और 1973 के योम किप्पूर युद्ध में भी पूरी दुनिया के समक्ष अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया था। 1991 के ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म और 21वीं सदी में ऑपरेशन इराकी फ्रीडम भी इस टैंक की भूमिका रही।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज(AR Live News)से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

Exit mobile version