- प्रदेश में कन्हैयालाल हत्याकांड जैसी घटना नहीं हो, इसके लिए राज्य सरकार का कदम
- मुख्यमंत्री ने 18.40 करोड़ रुपये की मंजूरी दी
- प्रदेश में हर संभागीय मुख्यालय और जिला मुख्यालय पर विकसित होंगी लैब
लकी जैन,(एआर लाइव न्यूज)। राजस्थान में बीते सालों में साइबर अपराध के साथ ही हुईं आतंकी घटनाएं और उपद्रव व हिंसक घटनाओं ने प्रदेश को कई बार हिला कर रख दिया है। उदयपुर में हुए कन्हैयालाल हत्याकांड आतंकी घटना से लेकर बीते सालों में अलग-अलग जिलों में हुए साम्प्रदायिक दंगों ने न सिर्फ अशांति और भय का माहौल बनाया, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए थे।
ऐसे अपराधों की रोकथाम और साइबर अपराध के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, इसके अनुसार प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी, काउंटर टेरेरिज्म और एंटी इंसर्जेंसी सेंटर स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इन सेंटर्स के लिए 18.40 करोड़ रूपए की मंजूरी भी दे दी है।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए रखेंगे अपराध की खुफिया जानकारी
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अनुमोदन से राजस्थान में प्रदेश स्तर से लेकर हर संभागीय मुख्यालय, आयुक्तालय और जिला मुख्यालय पर साइबर सिक्योरिटी, काउंटर टेरेरिज्म और एंटी इंसर्जेंसी सेंटर की लैब को स्थापित और विकसित किया जाएगा। यहां साइबर सुरक्षा, अपराध की खुफिया जानकारी, अनुसंधान और रोकथाम के लिए विभिन्न राज्यों और देशों में मौजूद सरकारी एजेंसियों से संपर्क कर राज्य के लिए लैब में सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा।
नए मैलवेयर, खतरों और वायरस के बारे में रहेंगे अपडेट
इस केंद्र की स्थापना से नए मैलवेयर, खतरों और वायरस के बारे में अपडेट करने में मदद मिलेगी। साथ ही साइबर क्राइम के बारे में ताजा अपडेट के लिए राज्य स्तरीय लैब में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश के हर जिला मुख्यालय पर चल रहे साइबर थानों को भी अपराध की जांच के लिए इन लैब से काफी मदद मिलेगी।

