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क्‍या आदिवासी समाज पर हिंदू विवाह अधिनियम लागू होता है?

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चौरासी विधायक राजकुमार रोत ने विधानसभा में लगाया सवाल

उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। विधानसभा के बजट सत्र में आदिवासी समाज पर हिंदू विवाह अधिनियम से जुड़े मामले की गूंज भी सुनाई दे सकती हैं। इसको लेकर चौरासी  (डूंगरपुर) विधायक राजकुमार रोत ने लिखित में सवाल लगाया हैं।

चौरासी विधायक ने गृह विभाग से पूछा हैं कि विगत 4 वर्षों में अनुसूचित क्षेत्र (TSP)में दहेज उत्पीड़न के कितने  मुकदमे दर्ज हुए ? । इसमें से किस-किस वर्ग के कितने मुकदमे झूठे पाए गए?, मुकदमों का जिलेवार संख्‍यात्‍मक विवरण सदन की मेज पर रखें। विधायक ने यह भी पूछा हैं कि क्‍या आदिवासी समाज पर हिंदू विवाह अधिनियम लागू होता है  ? यदि नहीं तो दहेज प्रताड़ना की धारा आदिवासियों पर किस प्रकार से लागू है? ।

विधायक ने यह भी पूछा हैं कि क्या सरकार आदिवासी समाज में दहेज प्रताड़ना के नाम पर हो रहे मुकदमो पर रोक लगाने का विचार रखती है ? । विधायक रोत आदिवासी क्षेत्र से आते हैं और आदिवासी समाज से जुड़ा सवाल विधानसभा में लगाया हैं। ऐसे में इस सवाल का जवाब आने पर सदन में इस मामले की गूंज सुनाई दे सकती है।

पोस्को के अंतर्गत दर्ज मामलों और उनके दुरुपयोग से जुड़ा सवाल भी लगाया

रोत ने लिखित में यह सवाल भी लगाया हैं कि अनुसूचित क्षेत्र में वर्ष 2018 से दिसम्‍बर 2022 तक पोस्को के कितने मामले दर्ज किये गये व उनमें से कितने मामले सही पाए गए ?। कितने झूठे पाए गए? कितनो में चालान पेश किया गया ?। अनुसूचित क्षेत्र में उक्‍त अवधि में जो पोस्को के मुकदमे दर्ज हुए हैं उसमें किस-किस वर्ग के कितने-कितने व्यक्तियों पर दर्ज किये गये हैं ? ।

राजकुमार रोत ने पूछा हैं कि क्या यह सही है कि इस आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में इस कानून की जानकारी नहीं होने से इसका दुरुपयोग हो रहा है ?और इस क्षेत्र के युवा अधिक संख्या में इस कानून के तहत जेलो में है ? यदि हां तो सरकार आदिवासी क्षेत्र के थानो में आए परिवादों को निपटाने के लिए 1 सप्ताह के लिए सामाजिक काउंसिल या ग्राम सभा स्तर पर इन परिवादों का निपटारा करने का विचार रखती है ?।

जन समस्याओं को लेकर अधिकारियों को दिए गए पत्रों का क्या हुआ?

विधायक रोत ने यह जानकारी भी लिखित सवाल के माध्यम से मांगा हैं कि विधानसभा क्षेत्र चौरासी के विधायक द्वारा जनहित की समस्याओं को लेकर जनवरी 2019 से अब तक संभागीय आयुक्त उदयपुर, टीएडी आयुक्त उदयपुर एवं डूंगरपुर जिले के जिला खण्ड एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को कितने पत्र लिखे ? कितने पत्रों के प्रत्युत्तर या पावती भेजी गयी और कितने पत्रों
का निस्तारण हुआ ?।

क्या समय पर पत्रों की पावती नही भिजवाना, निस्तारण नही करना, सामान्य प्रशासन एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के नियमों की अवहेलना करने के अंतर्गत आता है ? यदि हाँ, तो उक्त प्रश्न में ऊपर अंकित विभागों के अधिकारियों द्वारा अवहेलना की गयी तो क्या कार्यवाही अमल में लायी गयी?

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