उदयपुर में आईवीएफ सेंटर्स के लिए करती है काम
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर में नवजात बच्चों की तस्करी और उनकी खरीद-फरोख्त (child trafficking in udaipur) का खुलासा हुआ है। सवीना थाना पुलिस ने शुक्रवार को सात माह के नवजात की तस्करी करते एक महिला को गिरफ्तार किया है। महिला ने यह बच्चा झाड़ोल निवासी दंपत्ति से 70 हजार रूपए में खरीदा था और इसे 2 लाख रूपए में दिल्ली बेचने जा रही थी।
एसपी विकास शर्मा ने बताया कि जावरमाइंस के ओड़ा फला कालीघाटी निवासी राजकुमारी (30) पत्नी प्रेम हरमोर मीणा को गिरफ्तार किया है, महिला के कब्जे से 7 माह के शिशु को भी बरामद कर लिया है, बाल कल्याण समिति के आदेश पर फिलहाल बच्चे को शिशु गृह में रखा है। पुलिस ने बताया कि राजकुमारी सवीना थाना क्षेत्र के वीआईपी कॉलोनी, सेक्टर 9 में कमरा किराए पर लेकर रहती है और उदयपुर में आईवीएफ सेंटर्स के लिए काम करती है।
थानाधिकारी योगेन्द्र व्यास ने बताया कि पूछताछ में राजकुमारी ने कबूला है कि उसने यह बच्चा झाड़ोल निवासी पति-पत्नी रामलाल-पायल से 70 हजार रूपए में खरीदा था और इसे दिल्ली निवासी मनोज नाम के व्यक्ति को 2 लाख रूपए में बेचने वाली थी। रामलाल की गिरफ्तारी के लिए झाड़ोल टीम गयी हुई है, लेकिन रामलाल-पायल फरार है। वहीं दूसरी टीम दिल्ली निवासी मनोज नाम के व्यक्ति की तलाश कर रही है। पुलिस महिला का पुराना रिकॉर्ड खंगालने के साथ ही पता कर रही है कि क्या महिला बच्चों की खरीद-फरोख्त और तस्करी में पहले भी लिप्त रह चुकी हैं। इस कार्रवाई में हेडकांस्टेबल सोहन लाल और भगवती की विशेष भूमिका रही है।
बच्चा रो रहा था, तो लोगों को संदेह हुआ
पुलिस ने बताया कि गुरूवार रात महिला 7 माह के बच्चे को लेकर वीआईपी कॉलोनी सेक्टर 9 क्षेत्र में इधर-उधर घूम रही थी। बच्चा लगातार रो रहा था, लेकिन वह बच्चे को दूध नहीं पिलाकर बस घूम कर चुप कराने की कोशिश कर रही थी। यह देखकर कुछ लोगों को उसकी हरकतें संदिग्ध लगीं, तो क्षेत्रवासियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर महिला से पूछताछ की तो पहले तो उसने गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन सख्ती से पूछने पर महिला ने कबूल किया कि वह बच्चा खरीदकर लायी है और दिल्ली दो लाख रूपए में बेचेगी।
आईवीएफ सेंटर्स पर निगरानी की जरूरत
उदयपुर में पूर्व में भी अवैध रूप से चल रहे आईवीएफ सेंटर्स, किराए की कोख और नवजात का सौदा करने सहित अन्य संबंधित आपराधिक मामले आ चुके हैं। ऐसे में जरूरत है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और जिला सीएमएचओ जिले में चल रहे सभी आईवीएफ सेंटर्स पर नजर रखें और अवैध रूप से चल रहे आईवीएफ सेंटर्स पर कार्रवाई करें। बच्चों की तस्करी करने वालों को इन आईवीएफ सेंटर्स पर वे दंपत्ति आसानी से मिल जाते हैं, जो माता-पिता नहीं बन पा रहे हैं और किसी भी कीमत पर जीवन में एक बच्चा चाहते हैं।

