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जेएलएफ में थरूर बोले सुनक के ब्रिटेन प्रधानमंत्री बनने से यह साबित नहीं होता कि वहां नस्ल भेद खत्म हो गया है

jlf 2023 begins from 19 january for five days in clarks amer jaipurjlf 2023 begins from 19 january for five days in clarks amer jaipur

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) आज से शुरू

जयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF-2023) के 16वें संस्करण का गुरूवार को होटल क्लार्क्स आमेर में शुभारंभ हुआ। जेएलएफ में आए सांसद शशि थरूर ने लीगेसी ऑफ वॉयलेंस सेशन में अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत में माफियाराज अंग्रेजों से शुरू कर दिया था। ब्रिटिश काल के दौरान अंग्रेजों ने जलियांवाला बाग जैसे हत्याकांड को अंजाम दिया, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को लेकर शशि थरूय ने कहा कि ब्रिटेन को समझ आया कि वर्तमान हालात में कोई ब्राउन मैन ही उन्हें आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकता है। यही कारण है कि ऋषि वहां प्रधानमंत्री बन गए। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि ब्रिटेन में नस्लभेद खत्म हो गया है।

जेएलएफ 19 से 23 जनवरी तक चलेगा। फेस्टिवल के 16वें संस्करण में 21 भारतीय और 14 अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं से ताल्लुक रखने वाले करीब साढ़े तीन सौ स्पीकर आएंगे। स्पीकर्स और पैनलिस्ट्स में टॉम्ब ऑफ सैंड के लिए पिछले साल के अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता गीतांजलि, बुकर विजेता बर्नार्डिन एवरिस्टो, गुलजार, शोभा डे, शबाना आजमी, जावेद अख्तर, शशि थरूर, नोबेल पुरस्कार विजेता अब्दुल रज्जाक गुरनाह और भारतीय खुफिया ब्यूरो के पूर्व विशेष निदेशक अमरजीत सिंह दुलत सहित कई जाने-पहचाने लोग हिस्सा लेंगे।

हॉलीवुड की एक फिल्म हमारी पूरी इंडस्ट्री के बराबर है

बॉलीवुड की बुनियाद सेशन में फिल्म समीक्षक अजीत राय ने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि हम दुनियाभर में फिल्म बिजनेस की बात करें तो यूरोपियन मार्केट के मुकाबले हमारी जीडीपी 0.5 प्रतिशत है। पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री 5 हजार करोड़ रुपए की है, वहीं हॉलीवुड में एक फिल्म 2000 करोड़ में बनती है और 5000 करोड़ तक कमाती है। ऐसे में उनकी एक फिल्म हमारी पूरी इंडस्ट्री के बराबर है।

अजीत राय ने कहा बॉलीवुड का कोई क्रिएटिव माइंडसेट नहीं है। यही कारण है कि बॉलीवुड पिछड़ता जा रहा है। यहां सबसे कम पैसा लेखन और क्रिएटिव माइंडसेट पर खर्च किया जाता है। बॉलीवुड में सलेक्शन सबसे बड़ी समस्या है। क्या करना चाहिए, इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। पहले की बात करें तो हमारी इंडस्ट्री पूरी दुनिया में दिखाई जाती थी। संगम जैसी फिल्में कई देशों में तीन साल तक चलीं। इसलिए इसे बॉलीवुड नाम दिया गया। आज यह बॉलीवुड नहीं है।

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