चमोली,(एआर लाइव न्यूज)। उत्तराखंड के चमोली जिले में बने जोशीमठ (joshimath) शहर में हालात खबरा होते जा रहे हैं, जिसको लेकर स्थानीय प्रशासन ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। शहर में बनी इमारतों, होटल और घरों को तीन श्रेणी में बांटा गया है। डेंजर जोन में आने वाले घरों और इमारतों पर प्रशासन लाल क्रॉस का निशान लगा रहा है और लोगों को इन इमारतों के आस-पास या डेंजर जोन में नहीं जाने की अपील कर रहा है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार डेंजर जोन में आ रहे घर और इमारतें ऐसी हैं, जो कभी भी गिर सकती हैं, ऐसे में प्रशासन इन इमारतों को गिराएगा, जिसकी शुरूआत क्षेत्र में लग्जरी होटल मलारी इन और होटल माउंट व्यू को गिराने से की जाएगी।
इधर प्रशासन ने धंस रहे घरों में रह रहे परिवारों को राहत शिविरों में स्थानांतरित तो कर दिया है, लेकिन मंगलवार को स्थानीय लोगों ने राहत शिविरों की अव्यवस्थाओं के प्रति नाराजगी जताई और विरोध प्रदर्शन किए। घर गिराए जाने को लेकर स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अचानक से उन्हें घर छोड़कर जाने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन कहां जाए, इसकी कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गयी है।
कलेक्टर हिमांशु खुराना ने बताया कि जिले में अगले आदेश तक सभी निर्माणकार्यों पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा जो रिलीफ कैंप बनाए गए हैं, उसका अधिकारी निरीक्षण कर रहे हैं। साथ ही अस्थाई रूप से विस्थापित परिवार को राहत सामग्री भी दी जा रही है।
सर्वेक्षण कर तीन जोन में बांटे गए हैं क्षेत्र
आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुआवजे को लेकर सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीम इमारतों को हुए नुकसान की सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार कर रही है। सर्वेक्षण में क्षेत्र को तीन जोन में बांटा गया है। डेंजर जोन, बफर जोन और सेफ जोन। डेंजर जोन में वे मकान और इमारतें ली गयी हैं, जो पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं। बफर जोन में वे इमारतें हैं जिनमें अभी तो दरारें कम हैं, लेकिन ये दरारें बढ़कर डेंजर जोन में तब्दील हो सकती हैं। वहीं सेफ जोन में वे घर है, जहां बहुत कम दरारें हैं और उन मकानों को कोई खतरा नहीं है।
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