संवेदनशील और आस्था से जुड़ा मुद्दा बताकर जनप्रतिनिधि स्पष्ट राय देने से बचते नजर आए..
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। भगवान शिव पूरे देश में पूज्यनीय हैं, शिव किसी एक के नहीं, सबके हैं, नाथद्वारा में विश्वास स्वरूपम नाम से बनी विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा के अंदर लोगों के जाने और शिव मूर्ति की चोटी पर खड़े होने को लेकर लोगों ने विरोध जताया है और अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या जलाभिषेक करने के लिए भगवान शिव की प्रतिमा की चोटी पर ही खड़े होना ठीक है..? नाथद्वारा स्थित शिव प्रतिमा विश्वास स्वरूपम की चोटी पर लोग सीढ़ियों और लिफ्ट के जरिए पहुंच रहे हैं और शिव की चोटी पर खड़े होकर ही, शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं, तो क्या यह सही है..?
जनप्रतिनिधियों ने कहा संत ही कर सकते हैं मार्गदर्शन
इस संबंध में जब एआर लाइव न्यूज ने शिव प्रतिमा के लोकार्पण में शामिल हुए जनप्रतिनिधियों से बात की, तो वे इस सवाल का स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। जनप्रतिनिधियों ने कहा यह सवाल और मुद्दा आस्था और जनमानस की संवेदनाओं से जुड़ा है, इस पर संतों के विचार ज्यादा अहम होंगे। ऐसे में अब इस मुद्दे पर आमजन का मार्गदर्शन करने का यह रास्ता है कि खुद संत मुरारी बापू इस पर अपनी राय बताएं।
एआर लाइव न्यूज ने इस मुद्दे पर विधानसभा नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया, राजसमंद सांसद दीया कुमारी, राजसमंद विधायक दिप्ती माहेश्वरी से फोन पर बात की, वहीं राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को मैसेज कर और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ट्विट टैग कर इस मुद्दे पर उनकी राय जानने का प्रयास किया।
इस मुद्दे पर अब मुरारी बापू ही आमजनता का सही मार्गदर्शन कर सकते हैं। संत मुरारी बापू की राय इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्यों कि इस प्रतिमा का 29 अक्टूबर को पूरे सम्मान के साथ लोकार्पण उन्होंने ही किया था और उनके देश-दुनिया में लाखों करोड़ों फोलोअर्स भी हैं। आमजन और शिवभक्तों का सिर्फ यही सवाल है कि विश्वास स्वरूपम शिव प्रतिमा की चोटी पर खड़े होकर जलाभिषेक करना क्या सही है..?
उच्च स्तर पर बताई जनभावना
शिव दल मेवाड़ के प्रमुख मनीष मेहता ने बताया कि धर्म से जुड़ा यह मामला ध्यान में आने पर शिव दल मेवाड़ की ओर से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ईमेल के जरिए पत्र ज्ञापन भेजा गया है।

