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दक्षिण राजस्थान का पहला सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट अनन्ता हॉस्पिटल में हुआ

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उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। दक्षिण राजस्थान को मेडिकल जगत की एक बड़ी उपलब्धी हासिल हुई है, अनंता हॉस्पिटल के अनन्ता कैंसर सेंटर में सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया है। खास बात है कि यह यह दक्षिणी राजस्थान का पहला सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट है।

अनन्ता हॉस्पिटल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. नितिन शर्मा ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए अब तक राजस्थान के मरीजों को जयपुर या अहमदाबाद के हॉस्पिटल्स पर निर्भर रहना पड़ता था। 22 सितंबर को अनंता हॉस्पिटल में चिकित्सकों की टीम ने 60 वर्षीय मरीज का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है। राज्य सरकार की योजना आरजीएचएस के चलते यह ट्रांसप्लांट पूरी तरह निशुल्क हुआ है।

ऐसे में मरीजों खासकर दक्षिण राजस्थान और नीमच, रतलाम के मरीजों को कैंसर उपचार और बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए जयपुर या अहमदाबाद के महंगे इलाज के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। वे राजसमंद स्थित अनंता हॉस्पिटल में भी कैंसर का बेहतरीन इलाज और सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवा सकेंगे। यह बोन मैरो ट्रांसप्लांट डॉ रोहित, डॉ प्रतीक, डॉ निर्देश, डॉ दिव्यांशु औश्र नर्सिंग स्टाफ की टीम ने किया है। डॉक्टर नितिन शर्मा ने कहा कि हॉस्पिटल सामाजिक सरोकार में भी काफी कार्य कर रहा है। हॉस्पिटल में अगर कोई बच्चा कैंसर खासकर ब्लड कैंसर से पीड़ित आता है, तो हॉस्पिटल में उसका निशुल्क उपचार होता है।

डॉ. नितिन शर्मा ने बताया कि अनंता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने कैंसर पर रिसर्च एक्टिविटी शुरू की है। उम्मीद है कि आने वाले महीनों में देश और प्रदेश को अनंता हॉस्पिटल से क्लिनिकल ट्रायल में अच्छे रिजल्ट मिलेंगे।

मल्टीपल मायलोमा कैंसर से ग्रसित था मरीज

अनंता हॉस्पिटल के मेडिकल ऑनकोलॉजिस्ट डॉक्टर रोहित रोबेल्लो ने बताया कि बांसवाड़ा निवासी 60 वर्षीय दिलीप सिंह पुत्र भेरू सिंह सबसे पहले बीमारी के चलते 25 अप्रैल को अनन्ता अस्पताल आए थे। यहां टेस्ट में पाया गया कि उन्हें मल्टीपल मायलोमा नामक कैंसर है। मरीज हॉस्पिटल तक व्हील चेयर पर पहुंचे थे और चलने में पूरी तरह असमर्थ थे। मरीज की हालत को देखते हुए कैंसर को पूरी तरह खत्म करने बोन मैरो ट्रांसप्लांट का निर्णय लिया। हालां कि मरीज की हालत गंभीर होने से बोन मैरो ट्रांसप्लांट आसान नहीं था।

चिकित्सकों की टीम ने मरीज को 4 केमोथैरेपी के साईकल दिए, जिसके बाद मरीज अच्छा रेस्पोंस करने लगा, जिसके बाद मरीज की काउंसलिंग की 2 सितंबर से बोन मैरो ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की गयी, जो 20 दिन तक चली और 22 सितंबर को अनंता हॉस्पिटल की टीम ने सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को पूरा किया।

पूरी प्रक्रिया में लगे 20 दिन, शुरू के दिनों का हर मूवमेंट क्रिटिकल था

अनंता हॉस्पिटल के डॉक्टर प्रतीक ने बताया कि मरीज का जब बोन मैरो ट्रांसप्लांट शुरू किया गया तो उनकी 60 वर्षीय उम्र भी एक चुनौती थी। शुरू के 4 से 5 दिन काफी क्रिटिकल रहे। शुरूआती प्रक्रिया के दौरान मरीज को बुखार आना, बीपी घटना-बढ़ना, प्लेटलेट्स का बहुत कम हो जाना, उल्टी-दस्त होने जैसी चुनौतियां भी आती है। अनंता हॉस्पिटल के पीजी स्टूडेंट डॉ. दिव्यांशु ने 20 दिन तक हर घंटे-आधा घंटे में मरीज की कंडीशन को बहुत गहनता से मॉनीटर किया और हर पल की रिपोर्ट बनाई।

डॉक्टर प्रतीक ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट में कई बार ऐसे पल भी आते हैं कि उपचार संबंधी कोई भी बड़ा निर्णय लेने के लिए 5 मिनट से 15 मिनट ही होते हैं। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की पूरी टीम हर बात का ध्यान रखा और इस तरह दक्षिण राजस्थान का पहला सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो सका।

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