कोच्चि (एआर लाइव न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को केरल के कोच्चि में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत को नौसेना को सौंप दिया। इस एयरक्राफ्ट कैरियर को मेक इन इंडिया के तहत बनाया गया है।
20,000 करोड़ रुपये की लागत से बने आईएनएस विक्रांत का वजन 45 हजार टन है। इस अवसर पर पीएम मोदी ने नेवी के नए नौसेना ध्वज का भी अनावरण किया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हिरकुमार भी मौजूद थे।
भारत के पहले सबसे बड़े स्वदेशी एयरक्राफ्ट आईएनएस विक्रांत की खासियत
आईएनएस विक्रांत का निर्माण फरवरी 2009 में शुरू हुआ, इसके बाद अगस्त 2013 में पहली बार इसे पानी में उतारा गया। नवंबर 2020 में इसका बेसिन ट्रायल शुरू हुआ। जुलाई 2022 में समुद्री ट्रायल पूरा होने के बाद कोचीन शिपयार्ड ने इसे नौसेना को सौंप दिया। 18 राज्यों में इसके अलग-अलग पार्ट्स तैयार किये गए। इस एयरक्राफ्ट कैरियर में 76 फीसदी स्वदेशी सामान का उपयोग किया गया है।
भारत के समुद्री इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर शिप आईएनएस विक्रांत से 32 बराक-8 मिसाइल दागी जा सकेंगी। आईएनएस विक्रांत पर 30 एयरक्राफ्ट तैनात किये जायेंगे। जिनमें 20 मिग-29 लड़ाकू विमान और दस हेलीकॉप्टरों होंगे। नवंबर 2022 से मिग-29 के फाइटर जेट विक्रांत पर तैनात होने शुरु हो जाएंगे।
एक टाउनशिप जितनी बिजली आपूर्ति कर सकता है
पीएम मोदी ने बताया कि यह युद्धपोत से ज़्यादा तैरता हुआ एयरफील्ड है। यह एक टाउनशिप जितनी बिजली आपूर्ति कर सकता है। जिससे 5,000 घरों को रौशन किया जा सकता है। इसका फ्लाइंग डेक भी दो फुटबॉल फील्ड से बड़ा है। इसमें 2,600 किलोमीटर से ज्यादा इलेक्ट्रिक केबल का भी इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही 150 किलोमीटर से ज्यादा पाइपलाइन भी उपयोग में लाई गई है। इसे बनाने में 21 हजार टन से ज्यादा स्वदेशी विशेष ग्रेड स्टील लगी है।
इस एयरक्राफ्ट की ऊंचाई 61.6 मीटर यानी 15 मंजिला इमारत जितनी है। वहीं लंबाई की बात करें तो ये 262.5 मीटर लंबी है। इसमें 1600 क्रू मेंबर आराम से रह सकते हैं। इस जहाज में 2300 कंपार्टमेंट बनाए गए हैं।

