नई दिल्ली,(एआर लाइव न्यूज)। भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत 3 सितंबर को नौसेना में शामिल किया जाएगा। भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल एसएन घोरमड़े ने बताया कि इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि 20000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित आईएनएस विक्रांत ने पिछले महीने समुद्री परीक्षण के चौथे और अंतिम चरण को सफलतापूर्वक पूरा किया। अब भारत उन चुनिंदा राष्ट्रों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास स्वदेशी रूप से विमानवाहक पोत का डिजाइन और निर्माण करने की क्षमता है।
वाइस एडमिरल एसएन घोरमड़े ने बताया कि युद्धपोत के नौसेना बेड़े में शामिल होने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। विमान कैरियर की शुरुआत एक अविस्मरणीय पल होगा, क्योंकि यह भारत की समुद्री क्षमताओं को बढ़ावा देगा।
विक्रांत का निर्माण 2009 में शुरू हुआ था
जहाज में 2300 से अधिक डिब्बे हैं, जिन्हें लगभग 1700 लोगों के दल के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें महिला अधिकारियों के लिए विशेष केबिन भी हैं। विक्रांत की शीर्ष गति लगभग 28 समुद्री मील और लगभग 7500 समुद्री मील की सहनशक्ति के साथ 18 समुद्री मील की परिभ्रमण गति है।
विमानवाहक पोत 262 मीटर लंबा, 62 मीटर चौड़ा और 59 मीटर ऊंचा है। इसका निर्माण 2009 में शुरू हुआ था। नौसेना ने कहा कि जहाज 88 मेगावाट की कुल चार गैस टर्बाइनों द्वारा संचालित है और इसकी अधिकतम गति 28 समुद्री मील है।

