उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। शहर के महाकाल मंदिर से सोमवार को महाकाल शाही सवारी के रूप में नगर भ्रमण पर निकले। इस दौरान बड़ी संख्या में महाकाल भक्तों ने जयकारों के साथ इस शाही सवारी की शोभा बढ़ाई। जगह जगह भक्तों ने पुष्प वर्षा कर महाकाल के दर्शन किए।
सार्वजनिक प्रन्यास मंदिर श्री महाकाल की अगुवाई में शाही सवारी से पहले ब्रह्म मुर्हूत में प्रभु महाकालेश्वर की परम्परानुसार विधि विधान से पूजा अर्चना हुई। प्रभु महाकालेश्वर को रूद्रपाठ, सहस्त्रधारा अभिषेक व विभिन्न नदियों से लाए जल का अभिषेक कर महाकाल को विशेष श्रृंगार धरा भोग धराया गया। शाही सवारी में ब्रह्मा, विष्णु, हनुमान, माँ दुर्गा, माँ सरस्वती, माँ जगदम्बा के साथ पूरा शिव परिवार शामिल हुआ। शाही सवारी में सबसे आगे विघ्नहर्ता गणपति रहे। शाही सवारी में विभिन्न झांकिया भी शामिल की गई।
प्रन्यास सचिव चन्द्रशेखर दाधीच ने बताया कि शाही सवारी के लिए रजत पालकी को भव्य रूप से सजाया गया। सवा 5 किलो चांदी का छत्र बनाकर लगाया व प्रभु महाकालेश्वर का विग्रह स्वरूप श्रृंगारित कर पालकी में विराजित किया गया। अभिजित मुर्हूत में 12.15 बजे वैदिक मंत्रो के साथ सर्व समाजों के द्वारा रजत पालकी को मंदिर परिक्रमा करते हुए गुफा द्वार से महाकाल नगर भ्रमण के लिए निकलेे। मंदिर प्रांगण से शाही सवारी के निर्धारित पूरे मार्ग में गोमूत्र एवं गंगाजल का छिडकाव किया गया।
जगदीश चौक में हुआ महाकाल और जगन्नाथ स्वामी का मिलन
महाकालेश्वर की सवारी मंदिर प्रांगण से प्रस्थान कर चेतक सर्कल, हाथीपोल, मावा गणेशजी मार्ग, घण्टाघर होते हुए जगदीश चौक पहुंची। जगदीश चौक में भगवान हरि-हर का परस्पर मिलन हुआ। यहां से सवारी गणगौर घाट मार्ग,चांदपोल पुलिया,जाड़ा गणेश जी, नई पुलिया होते हुए अम्बमाता मंदिर पहुची। पुजारी परिषद द्वारा भगवान महाकालेश्वर व माँ अम्बा का पूजन किया। यहां से शाही सवारी राड़ाजी चौराहा होते हुए देर शाम महाकालेश्वर मंदिर पहुंची और महाआरती हुई।

