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फतहसागर से पीछोला को भरने की जल्दबाजी कहीं दुखदायी साबित नहीं हो जाए…

देवेन्द्र शर्मा, उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। इस बार पीछोला में उम्मीद अनुरूप पानी की आवक नहीं हुई है।दूसरी तरफ मदार नहर से फतहसागर में धीमी गति से आवक बनी हुई है। जलसंसाधन विभाग फतहसागर के पानी से पीछोला को भरने की तैयारी में लगा है, लेकिन इसे जल्दबाजी की तैयारी कहा जा सकता है।

फतहसागर और पीछोला के जलस्तर में अंतर को देखते हुए जलसंसाधन विभाग के अधिकारी फतहसागर-स्वरूप सागर लिंक का गेट खोलकर फतहसागर के पानी से पीछोला को भरने की तैयारी कर रहे है, लेकिन जलसंसाधन विभाग से रिटायर्ड हो चुके कई अधिकारी भी मजबूत तर्कों और तकनीकी अनुभवों के आधार पर अभी फतहसागर के पानी से पीछोला को भरने के पक्ष मेंं नहीं है। ये वो अधिकारी है जिनका सेवाकाल लंबे समय तक फतसागर और पीछोला के जल आवक की मॉनिटरिग करने में निकला है।

जलसंसाधन विभाग से रिटायर्ड हो चुके कई अधिकारी का कहना है कि फतहसागर से पीछोला को भरना तब लाजमी होगा, जब फतहसागर का जलस्तर पूर्ण क्षमता अनुसार 13 फीट पर पहुंच जाए और उसमें मदार नहर से तेजी से आवक जारी रहे।

जल आवक की मौजूदा स्थिति

मदार के दोनों तालाब पर चल रही चादर कम हो चुकी है। इससे मदार नहर से फतहसागर में हो रही आवक भी धीमी पड़ गई। फतहसागर का जलस्तर 13 फीट के मुकाबले 12 फीट हो चुका है। मदार नहर में बहाव घटकर 2 फीट 2 इंच ही रह गया है। सीसारमा नदी से हल्की आवक हो रही थी, वह भी बंद होने से पीछोला का जलस्तर 11 फीट के मुकाबले 6 फीट 5 इंच पर स्थिर बना हुआ है।

मानसून बाकी है और सवाल लाजमी हैं

  1. फतहसागर में अभी इतना अतिरिक्त पानी भी नहीं है कि इसके पानी से पीछोला को भरा जा सके। लिंक नहर से पानी डायवर्ट कर भी दिया जाए तो पीछोला का जलस्तर दो से तीन फीट बढ़ सकेगा। पीछोला का जलस्तर 6 फीट 5 इंच है।
  2. फतहसागर को खाली कर पीछोला को भरने की कोशिश के बीच मदार के कैचमेेंट में अच्छी बारिश नहीं हुई और मदार नहर से आवक बंद होने की स्थिति मेंं फतहसागर खाली रह सकता है। इसको फिर किसी भी दूसरे विकल्प के भरना संभव नहीं होगा। उसके बाद एक ही विकल्प बचता है वह बड़ी तालाब, लेकिन बड़ी तालाब खूद अभी काफी खाली है।
  3. फतहसागर से पीछोला को भर भी दिया और बाद में यदि पीछोला के कैचमेंट में तेज बारिश हो गयी तो सीसारमा नदी के तेज बहाव से पीछोला चंद घंटों में भर जाएगा और स्वरूपसागर पर चादर चलने लगेगी। तब पीछोला का पानी उदयसागर की तरफ बढ़ जाएगा। तब चाहते हुए भी इस पानी को क्षमता के अनुसार फतहसागर में डालना संभव नहीं होगा। तकनीकी रूप से 11 फीट लेवल के बाद न तो पीछोला से फतहसागर से पानी पहुंचाया जा सकता है, न फतहसागर से पीछोला में।
  4. देवास प्रथम, मादड़ी और आकोदड़ा बांध में इतना पानी आ चुका है कि जब चाहे इन तीनों बांधो का पानी डायवर्ट कर पीछोला को भरा जा सकता है। इसके अलावा मानसून का सीजन अभी बाकी है। दूसरी तरफ मदार नहर से आवक बंद हो गई तो फतहसागर खाली रह जाएगा और इसका झरना चलने की उम्मीदें भी अधूरी रह सकती है। ऐसी स्थिति में लोगों को फतहसागर का झरना नहीं देख पाने का मलाल साल भर रहेगा।
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