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प्रदेश में बढ़ने लगा एम सेंड का उत्पादन, कुल 36 इकाइयां है कार्यरत

M Sand production increasing in rajasthanM Sand production increasing in rajasthan

सरकारी निर्माण कार्यों में कम से कम 25 प्रतिशत एम सेंड का उपयोग है अनिवार्य

जयपुर(एआर लाइव न्यूज)। राज्य सरकार अब सरकारी निर्माण कार्यों में उपयोग में आने वाली कुल बजरी की मात्रा में कम से कम 25 प्रतिशत एम सेंड के उपयोग के प्रति गंभीर हो गई है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस डॉ. सुबोध अग्रवाल ने इस मामले में गुरुवार को सचिवालय में निदेशक माइंस केबी पण्डया व अधिकारियो के साथ एम सेंड नीति की प्रगति समीक्षा की। अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा जारी एम सेंड नीति में सरकारी निर्माण कर्यों मेें बजरी के विकल्प के रूप में कम से कम 25 प्रतिशत एम सेंड का उपयोग अनिवार्य है। अतिरिक्त निदेशक बीएस सोढ़ा को बजरी और एम सेंड नीति के क्रियान्वयन के लिए प्रभारी अधिकारी बनाया हुआ है।

36 एम सेंड इकाइयों द्वारा 1 करोड़ 20 लाख टन वार्षिक उत्पादन होने लगा

एसीएस डॉ.सुबोध अग्रवाल ने बताया कि एम सेंड नीति जारी होने के बाद अब प्रदेश में कुल मिलाकर 36 एम सेंड इकाइयों द्वारा 1 करोड़ 20 लाख टन वार्षिक उत्पादन होने लगा है। कर्नाटक में सर्वाधिक 2 करोड़ टन, तेलंगाना में 70 लाख 20 हजार टन और तमिलनाडू मेें 30 लाख 24 हजार टन एम सेंड का सालाना उत्पादन हो रहा है।

चीफ सेक्रेट्री ने भी सभी विभागों को दिए निर्देश

मुख्य सचिव उषा शर्मा ने भी संबंधित विभागों को एम सेंड नीति के निर्देश की पालना के निर्देश दिए है। राज्य सरकार के सभी सरकारी, अद्र्धसरकारी, स्थानीय निकाय, पंचायतीराज संस्थाएं एवं राज्य सरकार की वित्त पोषित अन्य संस्थाओं को जनवरी 21 के बाद जारी होने वाले कार्यादेशों में एम सेंड की कम से कम 25 प्रतिशत मात्रा के उपयोग को अनिवार्य किया गया है।

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