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वन्यजीव प्रेमियों को मिली आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व की सौगात

सीएम अशोक गहलोत ने किया उद्घाटन

जयपुर(एआर लाइव न्यूज)। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को अंतरार्ष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर मुख्यमंत्री निवास से आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व का उद्घाटन किया। 

सीएम गहलोत ने कहा कि आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व वन एवं वन्यजीव संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। प्रदेश के लिए शुभ संकेत है कि टाइगर, लेपर्ड और अन्य वन्यजीवों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही हैं। वन और वन्यजीव की सुरक्षा हमारी प्रतिबद्धता है। प्रदेश में 3 राष्ट्रीय उद्यान, 27 वन्यजीव अभयारण्य, 16 कंजवेर्शन रिजर्व और 4 टाइगर प्रोजेक्ट है।

सीएम गहलोत ने कहा कि इन सभी के संरक्षण के लिए अधिक संवेदनशीलता के साथ कार्य किए जा रहे हैं। जयपुर के झालाना डूंगरी स्थित विश्व वानिकी उद्यान की तर्ज पर जोधपुर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर और अजमेर में भी वानिकी उद्यान विकसित किए जा रहे हैं। 

राजस्थान ने दुनिया में पहचान कायम की

वन एवं पयार्वरण मंत्री हेमाराम चैधरी ने कहा कि दुनिया भर में राजस्थान ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में अपनी पहचान कायम की है। मुख्य सचिव  उषा शर्मा, वन विभाग के प्रमुख शासन सचिव शिखर अग्रवाल और प्रधान मुख्य वन संरक्षक दीप नारायण पाण्डेय ने आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व के भविष्य में होने वाले फायदे बताएं। अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरिंदम तोमर, राज्य वन्यजीव मंडल सदस्य  सिमरत कौर संधू, सुनील मेहता, धीरेन्द्र गोधा, सन्नी सबेस्टियन सहित कई जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और अधिकारी भी कार्यक्रम से जुड़े रहे।

1524 हैक्टेयर में फैला हुआ वन क्षेत्र

अरावली पर्वत श्रृंखलाओं पर स्थित आरक्षित वन खण्ड आमागढ 1524 हैक्टेयर में फैला हुआ वन क्षेत्र है। यह क्षेत्र जयपुर शहर के पूर्व में स्थित है। प्रदेश के पहले लेपडर् रिजर्व झालाना व नाहरगढ़ अभयारण्य के मध्य में स्थित होने के कारण यह वन क्षेत्र वन्य जीव संरक्षण एवं कॉरिडोर विकास की दृष्टि से  महत्वपूर्ण है। आमागढ़ वन खण्ड से लगते हुए ही आरक्षित वन खण्ड लालबेरी 112 हैक्टेयर स्थित है। दोनों वन खण्डों का कुल क्षेत्रफल 1636 हैक्टेयर है। जिसकी पैरिफेरी करीब 28.6 किलोमीटर है। लेपर्ड यहां का प्रमुख वन्य जीव है। 

लेपर्ड सहित कई वन्य जीव देख सकेंगे पर्यटक

आमागढ़ वन क्षेत्र में लगभग 15 लेपर्ड  हैं। इसके अलावा वन्य जीवों में मुख्यतः हायना, जैकाल, जंगली बिल्ली, लोमडी व सीवेट कैट हैं। सांभर, नीलगाय, खरगोश नजर आएंगे। इस अभ्यारण्य क्षेत्र में पक्षियों में स्थानीय व प्रवासी बर्ड्स सहित करीब 250 प्रकार की प्रजातियां पाई जाती हैं। पिट्ठा, पैराडाइज पलाई कैचर, गोल्डन औरियल, पाइड कुक्कू यूरेशियन कुक्कू, यूरेशियन रौलर, औरियन्ट स्कूप आउल, पैलिड स्कूप आउल, नौदर्न गौसौक, यूरेशियन स्पैरोहीक जैसे प्रवासी पक्षी देश-विदेश के विभिन्न कोनों से प्रजनन व भोजन की तलाश में यहाँ आते हैं। यहां 6 वाटर पाॅइन्ट बनाएं है।

सुबह- शाम पर्यटकों को मिलेगी सफारी सुविधा

पयर्टकों की सुविधा के लिए सफारी की ऑनलाइन बुकिंग हो सकेगी। सफारी सुबह और शाम दो पारियों में करवाई जाएगी। आमागढ़ सफारी के लिए टिकट खिड़की और प्रवेश द्वार प्रसिद्ध गलता मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर सिसोदिया रानी बाग के ठीक आगे है। क्षेत्र के आसपास कई किले और मंदिर हैं जैसे गलता मंदिर, आमागढ़ किला, रघुनाथ किला और अम्बामाता मंदिर भी बने हुए है।


	
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