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सांसद-विधायक हुए नाराज, सरकार के पास पहुंची 46 शिकायतें

शिलान्यास-लोकापर्ण समारोह में नहीं बुलाने पर हुए नाराज

उदयपुर (एआर लाइव न्यूज)। शिलान्यास-लोकापर्ण समारोहों में सांसद-विधायकों को नहीं बुलाने से कई जिलों में विवाद खड़ा हो चुका है। ऐसे विवाद जिला स्तर पर शुरू होकर सरकार तक भी पहुंचे है।

राज्य के प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जनप्रतिनिधियों को शिलान्यास-लोकापर्ण समारोह में नहीं बुलाने को लेकर प्रशासनिक सुधार विभाग को वर्ष 2019 से दिसंबर 2021 तक कुल 46 लिखित शिकायतें मिली है। जिन सांसद-विधायकों ने इस मामले में गहलोत सरकार को शिकायतें भेजी है उनमें कांग्रेस और भाजपा विधायकों, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के साथ ही भाजपा के तीन सांसदों के नाम भी शामिल है।

कटारिया सहित मेवाड़ के कई जनप्रतिनिधि भी शिकायत करने में आगे

प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग की रिपोर्ट के अनुसार नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता राजेंद्र राठौड़,कांग्रेस विधायक भरतसिंह कुंदनपुर, निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा सरकारी समारोह में आमंत्रित नहीं करने की शिकायत कर चुके है। राजकुमार रोत, फुलसिंह मीणा,धर्मनारायण जोशी, अमृतलाल मीणा, अर्जुनलाल जीनगर, प्रताप गमेती, सूर्यकांता व्यास, वासुदेव देवनानी,संजय कुमार शर्मा, कालूराम मेघवाल, अशोक लाहोटी, सुभाष पुनिया, नरेंद्र कुमार रामनारायण मीना, कल्पना देवी, कैलाश चंद्र मेघवाल, गोविंद प्रसाद, और गोपाल शर्मा संतोष बावरी, जाहिदा खान, आलोक बेनीवाल, इंदिरा देवी, रूपाराम मुरावतिया और बिहारीलाल विश्रोई भी सरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं करने को लेकर राज्य सरकार को शिकायत कर चुके है।

भाजपा सांसद देवजी पटेल ने की सबसे ज्यादा शिकायतें

विभागीय रिपोर्ट के अनुसार तीन साल में जालौर सांसद देवजी पटेल ने सबसे ज्यादा शिकायतें की है। पटेल ने 14 जून 2020 को पहली शिकायत की। उसके बाद उन्होंने अगस्त 2020, मार्च 2021, अप्रैल 2021 और जून 2021 में भी इस मामले में राज्य सरकार को शिकायतें भेजी। राजसमंद सांसद दिया कुमारी और टोंक-सवाईमाधोपुर सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया भी एक-एक बार शिकायत कर चुके है।

राज्य सरकार 2020 में जारी कर चुकी है निर्देश

राजकीय भवनों, आंशिक या पूर्ण रूप से राजकीय धनराशि से निर्मित भवनों के शिलान्यास-लोकापर्ण कार्यक्रमों या अन्य राजकीय समारोह जो राजकीय खर्चे से होते है। चाहे वो कार्यक्रम किसी राजकीय उपक्रम, बोर्ड, निगम या स्वायत्तशासी संस्था का हो। उनमें जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करना अनिवार्य है। इस सम्बंध में राज्य सरकार की ओर से 17 फरवरी 2020 को निर्देश भी जारी हुए है और समय समय पर सभी जिला कलेक्टर को परिपत्र भी जारी होते है।

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