उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। देश में लंबे समय से एक बड़ी बहस चल रही है कि महिला सुरक्षा के लिए बने कानूनों का कई महिलाएं दुरूपयोग कर रही हैं और किसी को भी फंसाने के लिए उस पर दुष्कर्म जैसे झूठे आरोप लगाने से भी पीछे नहीं हटती हैं। ऐसे ही एक मामले में उदयपुर में न्यायालय ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट में झूठे बयान देने के आरोप में युवती कोल्यारी हाल रामपुरा निवासी पायल पुजारी (उम्र 19 वर्ष) को तीन माह के कारावास (जेल) और 500 रूपए आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।
पोक्सो एक्ट के विशेष न्यायालय के न्यायाधीश भूपेन्द्र कुमार सनाढ्य ने आदेश में स्पष्ट लिखा है कि साक्षी (बयान देने वाला) ही न्यायालय की आंख एवं कान होते हैं और यदि कोई साक्षी न्यायालय में शपथ पर झूठी साक्ष्य देता है, तो न्यायालय को ऐसे मामलों में नरमी का रूख नहीं अपनाना चाहिए, यदि ऐसे मामलों में भी नरमी का रूख रखा गया तो झूठे साक्ष्य देने वाले गवाहों के कृत्य को प्रोत्साहन मिलेगा।
पहले कोर्ट में कहा दुष्कर्म हुआ, ट्रायल के दौरान बयानों से मुकर गयी युवती
विशिष्ठ लोक अभियोजक चेतन पुरी गोस्वामी ने बताया कि युवती ने गत वर्ष परिचित युवक के खिलाफ अंबामाता थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया था। अंबामाता पुलिस ने मामले की जांच की और मई 2021 में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट में बयान करवाए थे। कोर्ट में दिए बयानों ने युवती ने उसके साथ दुष्कर्म होने की वही कहानी बताई थी, जो उसने एफआईआर में लिखवाई थी। युवती के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अंबामाता थाना पुलिस ने कोर्ट में आरोपी युवक नवीन के खिलाफ चालान पेश कर दिया था, मामले में उसकी गिरफ्तारी भी हुई थी।
पुलिस के चालान पेश करने के बाद दुष्कर्म के इस मामले की कोर्ट में ट्रायल (सुनवाई) शुरू हुई। ट्रायल के दौरान युवती कोर्ट में उसके पूर्व में दिए बयानों से मुकर गयी। ट्रायल के दौरान युवती ने कोर्ट में कहा कि उसके साथ युवक ने दुष्कर्म नहीं किया है, युवक ने उसके साथ जनवरी 2021 में दबाव बनाकर विवाह किया था और विवाह पंजीयन भी करा लिया था, इसके बाद वह उसे माता-पिता के घर से जबरन ले जाना चाहता था और जब युवती ने साथ जाने से इनकार कर दिया तो उसने सोशल मीडिया पर कुछ फोटो पोस्ट कर दिए थे।
युवती युवक पर कार्रवाई करवाना चाहती थी, उसने थाने जाकर पुलिस को सारी बात बताई, तो एक पुलिसकर्मी ने ही युवती को सलाह दी कि वह युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाए। तब ही युवक पर कार्रवाई हो सकती है। इस पर युवती ने युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाकर झूठी एफआईआर दर्ज करवाई और कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत हुए बयान भी एफआईआर के अनुसार ही दिए।
कोर्ट ने झूठे बयान देने के संबंध में लिया स्वतः संज्ञान
ट्रायल के दौरान युवती ने जब अपने यह बयान दिए कि उसके साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था, तो कोर्ट ने युवक को दिसंबर 2021 में दोषमुक्त कर दिया था। इसके बाद कोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कोर्ट में धारा 164 के तहत झूठे बयान देने के आरोप में युवती के खिलाफ कार्यवाही शुरू की और उसे सीआरपीसी की धारा 344 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इस मामले में कोर्ट ने आज गुरूवार को युवती को तीन माह के कारावास और 500 रूपए आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।

