बच्ची के माता-पिता ने बदले बयान, लेकिन अभियुक्त पुलिस की मजबूत चार्जशीट को भेद नहीं पाया
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर जिले में पोक्सो एक्ट के विशिष्ठ न्यायालय ने चार साल की मासूम के साथ कुकृत्य करने वाले अपराधी मगनलाल मेघवाल को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाकर ऐसे अपराधों के खिलाफ एक सख्त संदेश दिया है।
न्यायाधीश भूपेन्द्र कुमार सनाढ्य द्वारा दिया गया यह आदेश इसलिए भी अहम हो जाता है, क्यों कि इस मामले में 4 साल की मासूम के माता-पिता पक्षद्रोही (बयानों से मुकरना) हो गए थे। लेकिन पुलिस द्वारा सभी साक्ष्यों के साथ पेश किए गए चालान को अभियुक्त नहीं भेद पाया। कोर्ट ने अभियुक्त पीपलवाड़ा, झाड़ोल निवासी मगनलाल मेघवाल पुत्र शंकरलाल के खिलाफ सख्त रवैया अपनाते हुए आदेश पारित कर आदेश में स्पष्ट कहा कि एक अबोध बालिका के साथ यौन हिंसा करने वाले अपराधी का स्थान समाज में न होकर कारावास में ही है। पीड़ित पक्ष की ओर से विशिष्ठ लोकअभियोजक चेतनपुरी गोस्वामी ने पैरवी की।
मासूम को खेलते-खेलते कमरे तक ले गया था अभियुक्त और किया था कुकृत्य
बच्ची के साथ हुई घटना 25 जुलाई 2019 की है। तब बच्ची उसके माता-पिता के साथ अंबामाता थाना क्षेत्र स्थित किराए के मकान में रहती थी। उसी मकान के ग्राउंड फ्लोर पर मूलतः पीपलवाड़ा झाड़ोल निवासी मगनलाल मेघवाल भी किराए पर कमरा लेकर रहता था। घटना के समय अभियुक्त की उम्र 21 वर्ष थी। 25 जुलाई 2019 को बच्ची घर के बाहर खेल रही थी, तभी मगनलाल उसे खेलते-खेलते उसके कमरे तक ले गया और उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया।
बच्ची जब काफी देर तक नहीं दिखाई दी तो उसके माता-पिता ने उसकी तलाश की, अभियुक्त मगनलाल का कमरा खुलवाया, तो मगनलाल संदिग्धावस्था में मिला और बच्ची रोती हुई कमरे से बाहर निकली। माता-पिता जब तक बच्ची को संभालते मगनलाल मौके से फरार हो गया था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई कर मामले में सभी अहम साक्ष्य जुटाए और आरोपी मगनलाल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने सभी साक्ष्यों के साथ आरोपी मगनलाल के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था।
कोर्ट ने दोनों पक्षो की सुनवाई कर सोमवार को आदेश सुनाया। इसमें दुष्कर्म के प्रयास के आरोप में आईपीसी की धारा 376AB/511 के तहत 20 साल के कठोर कारावास, बहला-फुसला कर अपहरण करने के आरोप में आईपीसी की धारा 363 और 366 के तहत 7-7 साल की कारावास और कुल 70 हजार रूपए के आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने कहा कि अबोध बालिका के माता-पिता पक्षद्रोही हो गए और उन्होंने अभियुक्त को बचाने का प्रयास किया हो, लेकिन इसमें उस अबोध बालिका का कोई दोष नहीं है, ऐसे में उसे पीड़ित प्रतिकर के 50 हजार रूपए राशि दी जाएगी। यह राशि अभियुक्त मगनलाल से लिए जाने वाले आर्थिक दंड में से पीड़िता को दी जाएगी।

