उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। शहर के पास स्थित बड़गांव के नारायण फार्म में चल रही संगीतमय भागवत कथा को रविवार को विराम लगा।
सातवें दिन कथा में पुष्कर दास महाराज ने कहा कि जीवन में संयोग और वियोग का जोड़ा है। दोनों को संतुलित ही गति का परिचायक है। कथा में भगवान कृष्ण के इंद्रप्रस्थ से विदाई के करुण प्रसंगों का वर्णन करते हुए द्वारका गमन की व्याख्या की। उन्होंने सुदामा चरित्र बताते हुए कहा कि सच्चा मित्र याचक नहीं होता किंतु परमात्मा अपने सखाओ को संकट में नहीं रहने देता है। महाआरती और भक्तों के जयकारों के बीच भागवत कथा के इस आयोजन पर विराम लगा।
कथा में कन्या विवाह भी हुआ
शनिवार को पुष्कर दास महाराज ने कृष्ण की बाल लीलाओं का विवेचन करते हुए भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर बृजवासियों को इन्द्र के कोप से बचाने की कथा सुनाई। विशेष प्रसंग रुकमणी विवाह का सुनाया गया कथा के दौरान ही एक कन्या विवाह भी करवाया गया।

