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सुविवि के साइंस कॉलेज डीन राठौड़ निलंबित

Dean Rathore of Science College suspendedDean Rathore of Science College suspended

उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर के सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के साईंस कॉलेज के डीन प्रो.धनश्याम सिंह को आखिरकार गुरुवार को निलंबित कर दिया गया। सीकर के प्रस्तावित गुरुकुल विश्वविद्यालय के भौतिक सत्यापन में हुई गड़बड़ी पर यह कारवाई हुई है। सुविवि के कुलपति अमेरिका सिंह की अध्यक्षता में बनी इस सत्यापन समिति में राठौड़ भी सदस्य थे।


सुविवि के कुल सचिव द्वारा गुरुवार को जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि 8 अप्रैल और 13 अप्रैल को राज्य सरकार से जारी पत्र में साईंस कॉलेज के डीन प्रो.धनश्याम सिंह पर सरकार का गलत तथ्य प्रस्तुत कर गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए है। प्रो0 राठौड़ के उल्लेखित कृत्य अत्यन्त ही गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसे में मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय उदयपुर के अधिनियम 1962 एवं इसके अधीन बनाये गये परिनियम 50 के पार्ट-4, कमांक 72 एवं अन्य संबंधित नियमों,प्रावधानों के तहत राठौड़ को तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया जाता है। निलंबन अवधि के दौरान राठौड़ को अपनी उपस्थिति अधिष्ठाता विश्वविद्यालय विज्ञान महाविद्यालय उदयपुर को देनी होगी।

एक दिन पहले ही सरकार ने कुलपति अमेरिका सिंह को चेताया था

राठौड़ के निलंबन में देरी करने पर एक दिन पहले ही राज्य सरकार ने सुविवि के कुलपति अमेरिका सिंह को नोटिस जारी कर राठौड़ को निलंबित कर दो दिन में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। इस नोटिस में अमेरिका सिंह को यह हिदायत भी दी गई थी कि प्रो.राठौड़ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर अनुशासनात्मक कारवाई करें अन्यथा राज्य सरकार को अन्य विकल्पों पर विचार के लिए बाध्य होना पड़ेगा। माना जा रहा है कि इसी सख्ती के चलते गुरुवार को आखिरकार राठौड़ को निलंबित करना पड़ा। हालांकि निलंबन से राहत के लिए राठौड़ पहले ही हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके है।

विधानसभा में मामला उठने पर हरकत में आयी राज्य सरकार

सीकर के गुरुकुल विश्व विद्यालय के भौतिक सत्यापन में हुए फर्जीवाड़े का मामला हाल ही में विधानसभा सत्र में भी उठ चुका है। इस मामले में भाजपा विधायक राजेंद्र राठौड़ ने तथ्यों के साथ विधानसभा में बताया था कि किस प्रकार गुरुकुल विश्व विद्यालय के भौतिक सत्यापन में फर्जीवाड़ा हुआ है। फर्जी रिपोर्ट तैयार होने से राज्य सरकार की किरकिरी होने पर सरकार को विधानसभा में पेश बिल को वापस लेना पड़ा। उसी के चलते राज्य सरकार ने सख्ती दिखाई। इस मामले में समिति के दो सदस्य पहले ही निलंबित हो चुके है।

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