उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। बडग़ांव स्थित नारायण फार्म में चल रही संगीतमय भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को पुष्कर दास महाराज ने कहा कि सद विचारो में रहना ही सही सत्संग है।
उन्होंने कहा कि सत्संग पूजा,पाठ, ध्यान, चिंतन, में समय गुजारता है वह स्वर्ग में है। जो राग, द्वेष, ईष्र्या, अहंकार, लड़ाई, झगड़ा, चिंता, विषाद में जी रहा है यही नरक है। व्यक्ति को समझाने के लिए कथा को कहानी का रूप दिया गया है, इसका ततवार्थ समझें बिना लाभ नहीं हो सकता है। हर कथा इस समय प्रतीकात्मक रूप है।
पुष्कर दास महाराज ने सुरूचि और सुनीति का अर्थ समझाते हुए कहा कि व्यक्ति सुरुचि के आधीन होने के कारण ही सांसारिक सुखों में फसता है। जो सुनीति ज्ञान के आधीन होता है उसे शाश्वत सुख मिलता है जो जिस वस्तु, व्यक्ति के साथ ज्यादा रहता है उसका उसमे में फसता ही है।

