बंदूक तानकर 10 लाख रूपए की अवैध वसूली के लिए जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
लकी जैन, उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। बेखौफ बदमाश, नाकाम पुलिस और डरी हुई जनता यह कोई वेब-सीरिज की मसालेदार कहानी नहीं, इन दिनों उदयपुर की हकीकत बनी हुई है। इन्हीं हालातों के चलते इन दिनों रंगदारी (एक्सटॉर्शन) का एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, क्यों कि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई से पीड़ित के बजाए कुख्यात हिस्ट्रीशीटर बदमाशों को राहत मिली है। पुलिस कार्रवाई में बरती जा रही कोताही का यह आलम तब है, जब मामला शहर के कुख्यात गैंगस्टर नरेश गैंग से जुड़ा हुआ है।
आईए कुछ स्टेप में समझते हैं कैसे अवैध वसूली के लिए जान से मारने की धमकी देने के संगीन मामले में पुलिस एफआईआर दर्ज करने से लेकर गिरफ्तारी तक नाकाम रही। उदयपुर में यही हालात रहे तो गैंगस्टर्स द्वारा व्यापारियों को धमकाकर उनसे की जाने वाली अवैध वसूलियां फिर शुरू हो जाएंगी और बदमाश बेखौफ होते जाएंगे।
स्टेप-1 : लॉ की पढ़ाई कर रहा बच्चा भी एफआईआर में धारा 384 और आर्म्स एक्ट की धारा जोड़ता
भुवाणा निवासी पीड़ित अरूण नीमावत ने 25 मार्च को सुखेर थाने पहुंचकर एफआईआर दर्ज करवाई कि वह पत्नी, बच्चे के साथ कार से जा रहा था। तभी एक कार ने उनकी कार को जबरन रोका। उस कार से 4-5 युवक तलवार, बंदूक, सरिए लेकर उतरे। बदमाशों ने पीड़ित की कार के कांच तोड़े, पीड़ित पर बंदूक तानी और जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित ने एफआईआर में स्पष्ट बताया कि शाम को साहिल ने फोन कर जान से मारने की धमकी देकर 10 लाख रूपए की फिरौती मांगी थी और कहा था कि अगर उदयपुर में सांस लेनी है, तो नाड़ा-खाड़ा नरेश के यहां 10 लाख रूपए लेकर आ जाना। नहीं आया तो जान से मार देंगे। पीड़ित ने धमकीभरी कॉल की रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपी।
पुलिस ने आईपीसी की धारा 143, 341, 427 में एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने न तो आर्म्स एक्ट की धाराएं लगाईं और न ही अवैध वसूली के लिए जान से मारने की धमकी देने की कोई धारा लगाई। जो धाराएं लगाईं वे जमानती हैं।
सेशन न्यायालय के पब्लिक प्रोसीक्यूटर (सरकारी वकील) कपिल टोडावत ने बताया कि एफआईआर में पीड़ित ने जो हालात बयां किएं हैं, उसके अनुसार अवैध वसूली के इरादे से धमकाने के आरोप में आईपीसी की धारा 384 और बंदूक तानने के आरोप में आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 लगनी चाहिए थी। ये दोनों ही धाराएं गैर जमानती हैं।
वकील भरत जोशी ने बताया कि इस मामले में आईपीसी की धारा 384 और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 लगनी चाहिए थी। एफआईआर में बताए हालात को देखकर कानून की पढ़ाई कर रहा कोई बच्चा भी यही धाराएं लगाता। ये धाराएं एफआईआर में नहीं लगने से बदमाशों को ही राहत मिलेगी।
सवाल : घटनाक्रम में गैर जमानती धाराओं का वर्णन होते हुए भी, पुलिस ने एफआईआर में क्यों सिर्फ जमानती धाराएं लगाईं।
स्टेप-2 : 10 लाख फिरौती की धमकी के बावजूद क्यों पीड़ित ने थाने में दिया कार्रवाई नहीं चाहने का एफीडेविड
एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने नरेश गैंग के नामजद गुर्गों साहिल सहित अन्य के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इधर बदमाश पीड़ित पर दबाव बनाते रहे। पुलिस से कोई मदद नहीं मिलने और बदमाशों की धमकियों से डरे हुए पीड़ित दबाव में आकर थाने में एफीडेविड दे दिया कि उसका तो बस कुछ लोगों ने रास्ता रोका था और कांच तोड़े थे। उसे कोई धमकी नहीं मिली। उसे किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करवानी है।
एफीडेविड आते ही पुलिस ने कुछ ही घंटों में नामजद आरोपी साहिल चौहान और उसके साथ भगवति साल्वी और कार्तिक चावरिया को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की प्रेस रीलीज भी जारी की गई
पिछले 15 सालों में अवैध वसूली के लिए धमकाने-हमला करने जैसे कई मामले दर्ज हुए हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि पीड़ित पक्ष ने बदमाशों के दबाव में आकर थाने में एफीडेविड दिया हो और पुलिस ने भी तत्काल एफीडेविड लेकर आरोपियों की सामान्य धाराओं में गिरफ्तारी बता दी हो।
सवाल : शहर के कुख्यात बदमाशों के खिलाफ एफआईआर होने के बावजूद आखिर क्यों पुलिस कार्रवाई करने से बच रही है। पुलिस क्या किसी के दबाव में है, इस बदमाशों को कौन संरक्षण दे रहा है।
स्टेप-3: प्रवीण पालीवाल हत्याकांड में गैंगस्टर नरेश सशर्त जमानत पर है
नरेश गैंग का रिकॉर्ड : उदयपुर में 8 साल पहले 16 मार्च 2014 को होली के दिन हिस्ट्रीशीटर गैंगस्टर नरेश ने शास्त्री सर्किल स्थित कपड़ों की दुकान में खरीददारी कर रहे विरोधी प्रवीण पालीवाल की गोलीमार कर हत्या कर दी थी। इसके बाद दोनों ही गैंग के बीच खूनी संघर्ष कई महीनों तक चला था और एक-के बाद एक हत्याएं हुई थीं। इससे पूरे शहर में एक डर का माहौल पैदा हो गया था।
तब दोनों ही गुट व्यापारियों को धमका कर अवैध वसूली करने, जमीनों पर जबरन कब्जा करने और कब्जा हटवाने का काम कर रहे थे।
प्रवीण पालीवाल की हत्या के आरोप में जेल में बंद नरेश को 7 साल बाद जमानत इसी शर्त पर मिली है, कि उसके खिलाफ अगर कोई संगीन मामले की एफआईआर दर्ज हुई तो जमानत खारिज हो जाएगी।
इस एफआईआर में नरेश बाल्मिकी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर, संगीन मामला होते हुए भी उचित धाराएं नहीं लगाकर पुलिस ने चाहे या अनचाहे नरेश को फायदा पहुंचाया है।
जानिए पुलिस अधिकारियों का क्या कहना है
मामले में अनुसंधान चल रहा है : थानाधिकारी दलपत सिंह राठौड़
- प्रश्न : एफआईआर में घटनाक्रम वर्णन के अनुसार धाराएं क्यों नहीं लगाई गयीं.?
जवाब: मामले में अनुसंधान चल रहा है, जांच में मामला सही पाया गया तो धाराएं जोड़ दी जाएंगी। - प्रश्न : पीड़ित ने बदमाशों के दबाव में आकर थाने में एफीडेविड दिया है.?
जवाब: हां पीड़ित ने एफीडेविड दिया है, हम पीड़ित को विश्वास में लेकर समझा रहे हैं कि वह ऐसा न करे। - प्रश्न : मामले में तो नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी कर थाने से जमानत भी दे दी है.?
जवाब: मामले की जांच चल रही है। जांच में जैसे-जैसे आरोप साबित होंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई होगी।
घटनाक्रम के अनुसार धाराएं जोड़ने के निर्देश दे दिए हैं : डीएसपी जितेन्द्र आंचलिया
- प्रश्नः एफआईआर में घटनाक्रम वर्णन के अनुसार धाराएं क्यों नहीं लगाई गयीं.?
जवाबः हमने चिट्ठी जारी कर दी है कि इसमें घटनाक्रम के अनुसार धाराएं जोड़ी जाएं। - प्रश्न : ऐसे संगीन मामले में प्रार्थी ने कार्रवाई नहीं चाहने का एफीडेविड दिया तो पुलिस ने क्यों स्वीकार कर लिया.?
जवाब : प्रार्थी बार-बार शिकायत में अपनी बात बदल रहा था। अनुसंधान अधिकारी ने गफलत में एफीडेविड ले लिया। बदमाशों की मुकदमे में गिरफ्तारी होनी है, अभी सीआरपीसी की धारा 151 में पाबंद किया है। - प्रश्न : लेकिन बदमाशों की तो मुकदमे में गिरफ्तारी हो चुकी है, इसकी प्रेस रीलीज भी जारी हुई है.?
जवाब : नहीं, वो प्रेस रिलीज गफलत में जारी हो गयी होगी, मुकदमें में आरोपियों की गिरफ्तारी होनी शेष है। - प्रश्न : थाना पुलिस से इतनी सारी गफलत एक साथ कैसे हो गयी.?
जवाब : किसी का कोई मेलाफाइड इंटेशन नहीं था। प्रार्थी बार-बार बयान बदल रहा था तो थाना पुलिस ने शुरूआत में इसे युवकों का आपसी विवाद समझ लिया था। - प्रश्न : 10 लाख रूपए की फिरौती हिस्ट्रीशीटर नरेश नाम से मांगी गयी, जिसका एफआईआर में वर्णन है.?
सवाल : मामले का अनुसंधान चल रहा है। प्रारंभिक अनुसंधान में नरेश की लोकेशन उस दिन गुजरात थी, वह इलाज के लिए गया हुआ था। तो उसकी इस मामले में क्या भूमिका है, इस पर जांच चल रही है।

