उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। जिले के सल्लाड़ा, सराड़ा में रविवार को हुई पूर्व सरपंच चंदन सिंह की हत्या ने दो परिवारों के बीच 18 साल से चले रहे खूनी संघर्ष से भी पर्दा उठाया है। पुलिस ने जब पूर्व उपसरपंच के हत्या के आरोपियों को पकड़ा तो आरोपी ने बताया कि उसने 4 साल की उम्र में पिता की हत्या देखी, वह 18 साल बदले की भावना में जलता रहा और अब जब वह बड़ा हुआ तो उसने चंदन सिंह की हत्या कर बदला ले लिया।
सराड़ा डीएसपी राजेन्द्र सिंह जैन ने बताया कि मुख्य आरोपी सल्लाड़ा निवासी विश्वनाथ प्रतापसिंह उर्फ विपी सिंह (22), कुलदीप (20) पुत्र वालजी पटेल को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं हत्या में सहभागी रहे एक अपचारी को डिटेन किया गया है।
इस 4 मार्च को ऐसा क्या हुआ कि बात हत्या तक गयी
पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी विपी सिंह ने बताया कि वर्ष 2004 में सल्लाडा पुर्व उप सरपंच चंदन सिंह और विपी सिंह के पिता खुमाण सिंह के बीच बोलचाल व लडाई झगडा हुआ। तब खुमाण सिंह ने चंदन सिंह और उसके भाईयो पर जानलेवा हमला कर चंदन सिंह के हाथ-पैर तोड़ दिये थे। जिसका थाने में 167/2004 मामला दर्ज हुआ। इस हमले का बदला लेने के लिए चंदन सिंह ने 2006 में अपने साथी के साथ मिलकर खुमाण सिंह की तलवार से हत्या कर दी। जिसका थाना सराडा में 79/2006 केस दर्ज हुआ था।
उस समय खुमाण सिंह का बेटा विपी सिंह महज 4 साल का था। जैसे-जैसे विपी सिंह बड़ा हुआ, उसमें चंदन सिंह से बदला लेने की भावना बढ़ती गयी। दोनों परिवारों में 18 साल से चल रही रंजिश और बदले की भावना में 4 मार्च को हुई घटना ने चिंगारी का काम किया। 4 मार्च को वीपी सिंह कांटे की बाड़ ठीक कर रहा था, तभी वहां से गुजरते हुए चंदन सिंह ने वीपी सिंह को कहा कि कांटे क्यो डाल रहा है, हटा ले नहीं, तो तेरे बाप की तरफ तुझे भी उड़ा दुंगा। इस बात पर विपी सिंह को गुस्सा आ गया और उसने अपने पिता की हत्या व खुद के अपमान का बदला लेने के लिए चंदन सिंह को मारने का प्लान बनाया।
बाड़े पर बैठकर 2 दिन किया इंतजार और फिर कर दी हत्या
सराड़ा थानेदार अनिल कुमार विश्नोई ने बताया कि आरोपी विपी सिंह सल्लाडा का रहने वाला है और मृतक चंदन सिंह खेतावतवाडा का रहने वाला है, खेतावतवाडा से सल्लाडा के लिए आने-जाने वाले रास्ते पर ही विपी सिंह का बाडा है। विपी सिंह ने घर पर रखी तलवार बाडा में लाकर रख दी। 5 मार्च को चंदन सिंह को मारने के लिए इंतजार किया। लेकिन उस दिन वह नहीं आया।
दूसरे दिन 6 मार्च को विपी सिंह फिर चंदन सिंह का इंतजार करने लगा। सुबह 8 बजे चंदन सिंह निकला, लेकिन तब वह पत्नी के साथ था तो विपी ने हमला नहीं किया और चंदन सिंह के अकेले आने का इंतजार करने लगा। 6 मार्च को ही चंदन सिंह दोबारा उसी रास्ते से अपनी गुजरा, तो विपी ने उसे रोका और तलवार से वार कर उसके हाथ और गर्दन काटकर निर्मम हत्या कर दी।

