उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। यूआईटी से नगर निगम को हस्तांतरित हुई आवासीय कॉलोनियों में 272 खाली भूखंडों के खुर्द-बुर्द होने या उन पर लोगों का अवैध कब्जा होने के आरोप लगने के मामले में नगर निगम की भूमिका पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। गुरूवार को उप महापौर पारस सिंघवी ने एक बार फिर निगम की तरफ से सफाई पेश की है।
उप महापौर पारस सिंघवी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि 272 सरकारी भूखंड के खुर्द-बुर्द होने का प्रकरण इन दिनों शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। महापौर जीएस टांक जांच कमेटी बनाई थी। उसकी दो बैठकें भी हो चुकी है। जांच कमेटी के सदस्य सहवृत पार्षद अजय पोरवाल ने हमें 5 भूखंड के दस्तावेज दिए थे। उसकी हमने जांच शुरू दी है। एक भूखंड को लेकर निगम एफआईआर दर्ज करवा चुका है। पारस सिंघवी ने बताया कि अभी तक की पड़ताल में सामने आया है कि कुछ लोगों ने गलत दस्तावेज पेश कर निगम से नामांतरण करवा लिया हैं। उन लोगों को 5 दिन में मूल दस्तावेज पेश करने का समय दिया है और हमने यूआईटी से भी इस संबंध में जानकारी मांगी हैं।
272 प्लॉट में से 120 पर तो लोग रजिस्ट्री भी करवा चुके हैं : पोरवाल
सहवृत पार्षद अजय पोरवाल ने बताया कि मैंने खुद यूआईटी और नगर निगम से दस्तावेज लेकर 272 प्लॉट की जानकारी प्राप्त की है। इसमें 120 प्लॉट की तो लोग रजिस्ट्री करवा चुके हैं। नगर निगम की जांच कमेटी ने पांच प्लॉट की जांच शुरू भी कर दी है।
सबसे बड़ा सवाल : निगम कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत ?
- चाहे 1 भूखंड हो या 272 भूखंड, फर्जी तरीके से या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री हुई तो अपराध हुआ है, इसमें किस कर्मचारी और अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत रही है, इसका खुलासा भी होना जरूरी है।
- महापौर इन 272 भूखंडों की लिस्ट जारी क्यों नहीं कर रहे। कम से कम यह तो बता ही सकते हैं कि ये भूखंड किन-किन क्षेत्रों में हैं।
- उपमहापौर तर्क दे रहे हैं कि कुछ लोगों ने गलत दस्तावेज देकर नामांतरण करवा लिया है। तो ये कुछ लोग कितने हैं।
- निगम के ध्यान में मामला आ गया है, तो उनकी सूचना सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है।
लोगों को गुमराह ही कर रहा निगम : दिनेश भट्ट
इस मामले में भाजपा के पूर्व शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट ने भी सवाल उठाया है। भट्ट का कहना है कि नगर निगम 272 भूखडों पर कब्जे होने की बातें कर लोगों को गुमराह करने का काम कर रहा है। यदि ऐसी गड़बड़ी सामने आयी है तो निगम को अब तक उन 272 भूखंडों की लिस्ट जारी कर देनी चाहिए थी। सिर्फ कागजी आंकड़ा बताकर अनावश्यक शहर में माहौल खड़ा किया जा रहा है।

