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कटारिया ने सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के कुलपति को ललकारा

उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय से जुड़ी चंपाबाग की जमीन को लेकर पिछले कई दिनों से कुलपति और भाजपा शहर जिला टीम के बीच चल रहे गतिरोध और आरोप प्रत्यारोप की राजनीति के बीच शनिवार को विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया भी खुलकर सामने आ गए।

कटारिया ने अमेरिका सिंह को ललकारते हुए खुला चैलेंज किया हैं कि कुलपति आरोप साबित कर देंगे तो उसी दिन विधानसभा की सदस्यता छोड़कर उदयपुर आ जाएंगे। या फिर कुलपति को विश्वविद्यालय छोड़कर उत्तर प्रदेश जाना होगा।

गुलाबचंद कटारिया ने एक वीडिया जारी कर अपने बयान में कहा हैं कि सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अमेरिका सिंह के लगातार बयान पढ़ रहा हुं। उनके बयान पढऩे से एसा लगता हैं कि ये किसी शिक्षक के या कुलपति के बयान नहीं लगते। वो जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं उससे लगता है कि उनमें शिक्षक के गुण दिखाई नहीं दे रहे है।
कटारिया ने कहा कि वो (कुलपति) बार बार चंपाबाग को कहकर जिस प्रकार के आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं। मैं उनसें प्रार्थना करता हुं कि इस प्रकरण में आप ही मेरे जज हैं, मेरे सभी डाक्यूमेंट या वहां जो भी रिकॉर्ड उपलब्ध हो। अगर उसमें मेेरे और मेरे परिवार के किसी का कोई कब्जा हो या उस पर भूमि पर हमने अधिकार किया हो या वहां जमीन खरीदी हो तो आपकी रिपोर्ट पर ही मैं विधानसभा छोड़कर उदयपुर आ जाउंगा। या फिर आप जिस प्रकार के आरोप लगा रहे हो अगर गलत साबित होते है तो आप सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय छोड़कर उत्तर प्रदेश चले जाए।

चाहे जिससे जांच करवा सकते अमेरिका सिंह

कटारिया ने कहा कि मेरी आपको (कुलपति)चुनौती हैं कि मेरा या मेरे परिवार के किसी भी व्यक्ति का इस चंपाबाग की जमीन पर किसी प्रकार का वैध या अवैध कोई आधार आपको मिले तो आप जांच कर ले, किसी जज से जांच करवाने चाहे तो उससे करवा ले, आप चाहे तो सीबीआई,एसीबी या पुलिस से जांच करवाना चाहते हो तो उससे करवा ले। मैं सबके लिए तैयार हूं। कटारिया ने कहा कि सबसे पहले 1978 में चंपाबाग विश्वविद्यालय को मिले इसके बारे में किसी ने पहल की तो वह मैने की थी। राजस्थान विधानसभा का रिकॉर्ड उठाकर देख सकते हैं। उससे आपको प्रमाणित हो जाएगा।

भय का माहौल बनाकर विश्वविद्यालय नहीं चला सकते

कटारिया ने कहा हैं कि भय का माहौल बनाकर विश्वविद्यालय को संचालित करना बहुत कठिन काम है। मेरी आपको चुनौती है कि मेरा जितना राजनीतिक जीवन है उतना तो आपकी नौकरी लगे हुए ही समय नहीं होगा। मेरी आपसे प्रार्थना हैं कि एक शिक्षक के शब्दों का प्रयोग करना सीखों। थोड़ा संजीदगी से बोलना सीख जाओ।

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