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बेणेश्वर धाम पर 400 साल पुराने चौपड़ों के डिजिटलाइजेशन का कार्य प्रारंभ

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र ने की संरक्षण की पहल

उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। मेवाड़ में आस्था के केन्द्र बेणेश्वर धाम पर संत मावजी के करीब 400 साल पुराने चौपड़ों के डिजिटलाइजेशन का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इनकी रेप्लिका तैयार होंगी। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर की पहल से यह काम शुरू हुआ हैं।

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर की निदेशक किरण सोनी गुप्ता ने बताया कि बेणेश्वर धाम के महंत अच्युतानंद महाराज के आग्रह पर कलाकृतियों के डिजिटलाइजेशन का कार्य शुरू किया गया हैं। प्रथम चरण में साबला व शेषपुर स्थित संत मावजी के चोपड़े का डिजीटलाईजेशन करते हुए इनकी रेप्लिका प्रतिकृतियां तैयार करवाई जाएगी।

बेणेश्वर धाम की गौरव गाथा और ज्यादा लोगों तक पहुंच पाएगी

बेणेश्वर धाम के महंत अच्युतानंद महाराज ने बताया कि चौपड़ों का डिजिटलाइजेशन होने से संत मावजी और बेणेश्वर धाम की महत्ता और गौरव गाथा और ज्यादा लोगों तक पहुंच पाएगी। बेणेश्वर केंद्रित संग्रहालय बनता है तो श्रद्धालुओं और गुरु भक्तों के लिए और ज्यादा खुशी की बात होगी

साबला के बाद शेषपुर चोपड़ा होगा डिजिटल

चौपड़ों के डिजिटलाइजेशन कार्य के समन्वयक व उदयपुर के सूचना एवं जनसंपर्क उपनिदेशक डॉ. कमलेश शर्मा ने बताया कि पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा एक फर्म को यह काम सौंपा गया हैं। हरि मंदिर साबला स्थित चोपड़े की फोटोग्राफी की जा चुकी हैं, अब 28 जनवरी को शेषपुर स्थित चोपड़े की फोटोग्राफी की जायेगी। इनकी प्रदर्शनी के लिए सॉफ्ट व हार्ड कॉपी तैयार की जाएगी। एक डिजिटल बुक भी तैयार कर ऑनलाइन भी उपलब्ध करवाई जाएगी।

शिल्पग्राम में प्रदर्शनी लगाई जाएगी

डिजीटलाईजेशन के बाद कलाकारों के माध्यम से इसकी प्रतिकृतियां तैयार करवाते हुए शिल्पग्राम में इनकी प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साबला में चोपड़े की फोटोग्राफी के दौरान एपीआरओ प्रवीण भटनागर, बेणेश्वर धाम संग्रहालय के प्रभारी और इतिहासविद रवींद्र डीपंड्या, नरहरि भट्ट, शेषपुर से हीरालाल खासोर, मनोहर खासोर, अनिल खासोर भी मौजूद थे।

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