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कैबिनेट बैठक : संविदा नियुक्ति के लिए गहलोत सरकार ने लिया बड़ा फैसला

चारागाह भूमि पर 30 वर्ष से बसे लोगोंं को 100 वर्गमीटर का पट्टा मिलेगा।

जयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। मुख्यमंत्री निवास पर बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में संविदा नियुक्ति के लिए नियम बनाने, चरागाह भूमि पर बसी सघन आबादी के नियमितिकरण के लिए नीति के प्रारूप के अनुमोदन सहित कई बड़े नीतिगत निर्णय लिए गए।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य एवं केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों की क्रियांविति के लिए एक निश्चित अवधि के लिए कार्मिकोंं की संविदा नियुक्ति के लिए राजस्थान कॉन्ट्रेक्चुअल अपॉइंटमेंट टू सिविल पोस्ट्स रूल्स-2021 बनाने का अनुमोदन किया गया।

प्रदेश में इथेनॉल उत्पादन इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राजस्थान इथेनॉल प्रोडक्शन प्रमोशन पॉलिसी-2021 को मंजूरी भी दी गई। भू-आवंटन नीति-2015 के प्रावधानों में शिथिलता प्रदान करते हुए भरतपुर की श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर योजना में मीणा छात्रावास के लिए 17 बिस्वा भूमि नि:शुल्क आवंटित करने का अनुमोदन भी किया गया।

बैठक में ये बड़े फैसले भी हुए :

  • केबिनेट ने चारागाह भूमि पर बसी सघन आबादी के नियमितिकरण के लिए प्रस्तावित नीति के प्रारूप का अनुमोदन किया है। इसके तहत चारागाह भूमि पर कम से कम 30 वर्ष से घर बनाकर रह रहे परिवारों में से प्रति परिवार अधिकतम 100 वर्गमीटर का पट्टा देंगे। आयकरदाता व्यक्ति को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
  • मंत्रिमंडल ने राज्य में 1500 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क की स्थापना के लिए राज्य सरकार तथा मैसर्स अदाणी रिन्यूबल एनर्जी पार्क राजस्थान लिमिटेड की हिस्सेदारी की ज्वॉइन्ट वेंचर कंपनी को जैसलमेर के भीमसर एवं माधोपुरा, सदरासर गांव में 1324.14 हैक्टेयर तथा बाटयाडू एवं नेडान गांव में 276.86 हैक्टेयर राजकीय भूमि सशर्त आवंटित करने की मंजूरी दी है।
  • करीब 30 मेगावाट विंड सोलर हाइब्रिड पावर प्रोजेक्ट की स्थापना के लिए केरालियां गांव मे 64.38 हैक्टेयर राजकीय भूमि को लीज पर सशर्त आवंटित करने की मंजूरी दी गई। इससे सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • राजस्थान नगर नियोजन सेवा नियम-1966 में संशोधन को मंजूरी दी गई। इससे सहायक नगर नियोजक की सीधी भर्ती के लिए आवश्यक अर्हता में बैचलर ऑफ प्लानिंग तथा मास्टर ऑफ प्लानिंग को शामिल किया जा सकेगा। इससे नगर नियोजन से जुड़े काम सरलता और समय पर हो सकेंगे।

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