पंचायत से फर्जी तरीके से तैयार किया था रिकॉर्ड
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। फतहसागर किनारे राजीव गांधी पार्क के सामने आठ बीघा जमीन से जुड़े मामले में जोधपुर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया हैं। इस जमीन की कीमत करीब 200 करोड़ रूपए आंकी गयी है। फैसले के अनुसार जो मोड़ा भील इस जमीन को अपनी बता रहा था, उसका रिकॉर्ड ही बड़ी पंचायत से फर्जी तरीके से तैयार किया गया था।
बताया जा रहा है कि इस जमीन पर कब्जा करने को लेकर इसके पीछे उदयपुर के कुछ बड़े भू माफिया का भी हाथ है।
कब्जा मुक्त कराने के लिए तत्कालीन सचिव राम निवास मेहता ने किए थे प्रयास
झील किनारे रानी रोड से सटी इस बेशकीमती जमीन को कब्जा मुक्त करवाने तत्कालीन सचिव रामनिवास मेहता ने काफी प्रयास किए थे। उसके बाद यह मामला जोधपुर हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। अब हाईकोर्ट से यह फैसला आने से यूआईटी का पक्ष और मजबूत होता नजर आ रहा है।
हालांकि इस जमीन को लेकर मोडा भील ने तत्कालीन यूआईटी सचिव रामनिवास मेहता, तत्कालीन ओएसडी ओमप्रकाश बुनकर और तहसीलदार के विरुद्ध ग्राम न्यायालय उदयपुर में भी केस दर्ज करवा रखा है। उसकी अगली सुनवाई 5 जनवरी 2022 को होनी हैं। ऐसे में ग्राम न्यायालय में सुनवाई पूरी होने के बाद इस जमीन को लेकर स्थिति पूरी तरह से साफ हो सकेगी।
बड़ी ग्राम पंचायत ने मोडा भील का इस जमीन पर कब्जा बता दिया था, उसको तत्कालीन कलेक्टर बिष्णुचरण मलिक ने निरस्त कर दिया था। उसके बाद यूआईटी ने 2018 में इस जमीन पर नजर रखने तीन से चार महीने पुलिस और होमगार्ड के जवान भी तैनात किए गए थे। इस मामले में यूआईटी और राज्य सरकार की तरफ से दिलीप कावडिया ने पैरवी की।

