Site iconSite icon AR Live News

वल्लभनगर उप चुनाव : कटारिया ने जो तेजाब भींडर के लिए तैयार किया, आज वो भाजपा की जड़ों को ही खत्म करता दिख रहा

vallabhnagar by election 2021 gulab chand kataria vs randhir singh bhindervallabhnagar by election 2021 gulab chand kataria vs randhir singh bhinder

देवेन्द्र शर्मा/ उदयपुर, (एआर लाइव न्यूज)। कहते हैं कि राजनीति में कब पासा उल्टा पड़ जाए कहा नहीं जा सकता। ऐसी ही बानगी वल्लभनगर विधानसभा सीट पर हो रहे विधानसभा उप चुनाव में देखने को मिल रही हैं। वल्लभनगर में आज वही उदयलाल डांगी आरएलपी से चुनाव लड़कर भाजपा की जड़ों में तेजाब डालने का काम कर रहे हैं, जो तेजाब किसी समय भाजपा नेता गुलाबचंद कटारिया ने पूर्व विधायक रणधीरसिंह भींडर और उनकी जनता सेना की जड़ों में डालने के लिए तैयार किया था।

कटारिया ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि रणधीर सिंह भींडर को कमजोर करने उन्होंने उदयलाल डांगी के रूप में जो मजबूत सारथी तैयार किया है, एक दिन वो ही हनुमान बेनीवाल के साथ मिलकर उन्हीं की पार्टी (भाजपा) को आंख दिखाते नजर आएंगे।

कटारिया की वो ललकार सुनाई नहीं दे रही..

वल्लभनगर के राजनीतिक मैदान पर 2013 के विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा हैं कि किसी चुनाव में कटारिया न तो गरजते नजर आ रहे हैं, न उनकी वो ललकार सुनाई दे रही हैं जो आम तौर पर चुनावी माहौल में सुनाई दिया करती थी। 2013 के विधानसभा चुनाव के बाद दो बार लोकसभा चुनाव और एक बार विधानसभा चुनाव हुए। इनके अलावा पंचायत और पालिका चुनाव भी हुए। हर बार कटारिया वल्लभनगर में गरजते और बरसते नजर आए। अधिकांश बार उनके निशाने पर कांग्रेस से ज्यादा रणधीरसिंह भींडर और उनकी जनता सेना ही रहे।

राजनीतिक बैठकों, सम्मेलनो में भी कटारिया विरोधियों को ललकारते ही नजर आए। उनकी वैसी ललकार अब तक इस उप चुनाव में सुनाई नहीं दी है। इसके पीछे एक बड़ा कारण कटारिया के सबसे विश्वासपात्र उदयलाल डांगी का भाजपा से टिकट कटने को माना जा सकता हैं। यह स्थिति तब हैं जब मतदान में अब पांच दिन का समय ही बचा हैं और चुनाव आयोग की गाइड लाइन अनुसार 30 अक्टूबर को होने वाले मतदान से 72 घंटे पहले चुनावी शौर शराबा भी बंद हो जाएगा।

2018 चुनाव में भींडर की गणित बिगाड़ने कटारिया ने जिसे तैयार किया, वह अब बेनीवाल के काम आया

कटारिया का तैयार किया हुआ खिलाड़ी चुनावी मैदान में आज बेनीवाल के काम आ गया। 2013 के विधानसभा तक उदयलाल डांगी पूर्व विधायक रणधीर सिंह भींडर की टीम के मजबूत स्तंभ माने जाते थे। धनबल और डांगी की सक्रियता देख कटारिया ने 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले ही उदयलाल डांगी पर नजरें गड़ा ली और उनको भींडर की टीम से तोडऩे में सफल भी रहे। इसके बाद कटारिया ने वल्लभनगर के राजनीतिक मैदान में सीधे सीधे भींडर को टक्कर देने के मकसद
से उदयालाल को मजबूत खिलाड़ी के रूप में तैयार किया।

उदयलाल डांगी को कटारिया ने ही टिकट दिलावाकर 2018 में विधानसभा चुनाव लड़वाया। उसमें डांगी तो जीत नहीं पाए, लेकिन रणधीर की गणित बिगाड़ दी। इस चुनाव में भले ही डांगी चुनाव हार गए, लेकिन मन ही मन कटारिया की यह जीत थी। क्यों कि उनका सबसे बड़ा मकसद भींडर की राह रोकनी थी और उसमें डांगी के सहारे वे सफल हो गए।

जबकि 2013 के चुनाव में कटारिया की पसंद और ब्राह्मण वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने गणपत मेनारिया को मैदान में उतारा था, लेकिन मेनारिया उस चुनाव में रणधीर भींडर की गणित बिगाडऩे की बात तो दूर खूद की जमानत भी नहीं बचा पाए थे।

Exit mobile version