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लॉकडाउन में दिव्यांग के साथ मारपीट : पुलिस निरीक्षक पर 20 हजार का जुर्माना

राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष व्यास ने डीजीपी से की अनुशंषा

उदयपुर(ARLive news)। राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास ने लॉकडाउन के दौरान बांसवाड़ा में पंक्चर की दुकान चलाने वाले एक दिव्यांग युवक के साथ मारपीट मामले में प्रथम दृष्टया एक पुलिस निरीक्षक को दोषी मानते हुए उस पर 20 हजार रूपये का जुर्माना लगाने की अनुशंषा की है।

सोमवार को उदयपुर के सर्किट हाउस में लगी कैम्प कोर्ट में इस प्रकरण का निस्तारण करते हुए जस्टिस व्यास ने डीजीपी एमएल लाठर कोे सम्बंधित पुलिस निरीक्षक पर नियमानुसार कार्रवाई करने और पीड़ित दिव्यांग युवक को इस पुलिस अधिकारी के वेतन से 20 हजार का हर्जाना दिलवाने की अनुशंषा की हैं।

एक अन्य प्रकरण का निस्तारण करते हुए जस्टिस व्यास ने अधिकारियों को संयम बरतने की सलाह दी हैं। दो घंटे तक चली कैम्प कोर्ट में 43 प्रकरणों पर सुनवाई कर 20 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। कैम्प कोर्ट के बाद आयोग अध्यक्ष ने जनसुनवाई भी की। इस दौरान राज्य मानवाधिकार आयोग के रजिस्ट्रार ओमी पुरोहित, उदयपुर कलक्टर चेतन देवड़ा, एसपी डॉ. राजीव पचार, नगर निगम आयुक्त हिम्मत सिंह बारहठ सहित सम्बंधित अधिकारी मौजूद थे।

यह है मामला :

कमलेश बैरागी निवासी भागाकोट गली नंबर-2 बांसवाड़ा ने परिवाद पेश किया था कि 30 अप्रेल 2021 को लिओ चौराहे वह अपनी दुकान पर पंक्चर निकालने का कार्य कर रहा था। तब पुलिस की गाड़ी आई और बिना किसी वजह के उसके साथ पुलिसवालों ने मारपीट कर दी। पीड़ित ने बताया कि एक पुलिस वाले की वर्दी पर तीन स्टार लगे हुए थे। पीड़ित युवक ने इसकी शिकायत राज्य मानवाधिकार आयोग से की थी। तब तत्कालीन थानाधिकारी थाना सदर रतनसिंह को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए बांसवाड़ा एसपी ने पुलिस लाइन भेज दिया और उसके खिलाफ विभागीय जांच जारी है।

ऑनलाइन देख सकते हैं शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई

आयोग अध्यक्ष व्यास ने बताया कि आयोग को प्राप्त होने वाली शिकायतों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके लिए आयोग ने वेबसाइट पर एक नया लिंक शुरू किया है, जिस पर क्लिक करके परिवादी अपना केस नंबर, रसीद नंबर, पीडि़त का नाम, ईमेल या फोन नंबर इनमें से किसी भी एक की जानकारी प्रविष्ट कर अपने लंबित प्रकरण के बारे में सूचना प्राप्त कर सकता है।

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