उदयपुर,(ARLive news)। मेवाड़ की गवरी का अपना इतिहास और खासियत है। गवरी के रंग इन दिनों दिल्ली में भी देखे जा सकते हैं। दिल्ली से सटे गुरूग्राम में फोटोग्राफिक आर्ट्स के लिए प्रख्यात म्यूजियो कैमरा सेंटर में गवरी के विभिन्न चित्रों की एग्जिबिशन लगी हुई है। 17 सितंबर से शुरू हुई एग्जिबिशन 17 अक्टूबर तक चलेगी। खासबात है कि एग्जिबिशन में लगी फोटोग्राफ्स उदयपुर के आर्टिस्ट राजेश सोनी और वासवो एक्स की हैं। फोटोग्राफ्स में गवरी नृत्य के विभिन्न रूप-रंगों को बखूबी दिखाया गया है।
उदयपुर के आर्टिस्ट राजेश सोनी ने बताया कि उनके मित्र वासवो एक्स ने गवरी डांस की लाइव ब्लैक एंड व्हाईट फोटोग्राफ्स ली थीं। थर्ड जेनरेशन हैंड कलरिंग आर्टिस्ट राजेश सोनी ने गवरी नृत्य की ब्लैक एंड व्हाईट फोटोग्राफ्स में रंगभर इन्हें जीवंत कर दिया। एग्जिबिशन की हर तस्वीर बोलती हुई सी जीवंत नजर आ रही है।
क्या है गवरी नृत्य
मेवाड़ में गवरी नृत्य एक अनोखी आदिवासी परंपरा और कठिन व्रत है। इस नृत्य को आदिवासी समाज के लोग करते हैं। यह नृत्य क्षेत्र की खुशहाली मनोकामना के साथ देवी को खुश करने के लिए किया जाता है। इस नृत्य में जो शामिल होते हैं, वह सभी पुरूष होते हैं और यह व्रत 40 दिनों तक चलता है। गवरी व्रत लेने वाले लोग 40 दिनों तक अपने घर नहीं जाते, जमीन पर सोना, हरी सब्जी नहीं खाना, मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना, पूरे महीने में सिर्फ एक बार नहाने जैसे कई कठिन नियमों का पालना भी करते हैं।

