नई दिल्ली,(ARLive news)। किसान आंदोलन पर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए देश के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को लखीमपुर खीरी मामले पर टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं होती हैं तो कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेता है।
इस बीच केंद्र की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि लखीमपुर खीरी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आगे कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में किसान महापंचायत को जंतर मंतर पर सत्याग्रह करने की अनुमति देने की याचिका पर सुनवाई चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के संगठनों से पूछा कि शीर्ष अदालत ने तीन कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है और ये अधिनियम लागू नहीं हैं। आप किस बात का विरोध कर रहे हैं। न्यायालय ने आगे कहा कि कानून की वैधता को लेकर संगठनों द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाए जाने के बाद विरोध करने का सवाल कहां आता है।
गौरतलब है कि कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठन पिछले 10 महीने से दिल्ली के बॉर्डर पर विरोध प्रदर्श कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फटकार के बाद किसानों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर सत्याग्रह करने की अनुमति मांगते हुए एक याचिका दायर की थी।
मृतक किसान के परिवार को 45 लाख रूपए आर्थिक सहायता देगी सरकार
रविवार को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में हुई घटना के बाद से पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। किसान अलग-अलग जगह प्रदर्शन कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के ADG प्रशांत कुमार ने बताया, कल लखीमपुर खीरी में मारे गए 4 किसानों के परिवारों को सरकार 45 लाख रुपए और एक सरकारी नौकरी देगी। घायलों को 10 लाख रुपए दिए जाएंगे। किसानों की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज मामले की जांच करेंगे। सीआरपीसी की धारा 144 लागू होने के कारण राजनीतिक दलों के नेताओं को ज़िले का दौरा नहीं करने दिया गया है। हालांकि, किसान संघों के सदस्यों को यहां आने की अनुमति है।

