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उपचुनाव के बहाने भीम सिंह की 2023 के विधानसभा चुनाव पर है नजर.?

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उदयपुर(ARLive news)। कांग्रेस विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत के निधन के बाद वल्लभनगर की राजनीति में एक नाम अचानक तेजी से उभर कर आया हैं और वह है भीम सिंह चुंडावत…!शक्तावत के निधन के बाद भीमसिंह की क्षेत्र में सक्रियता शुरू हुई। उपचुनाव की घोषणा के बाद टिकट को लेकर उनकी सक्रियता और ज्यादा बढ़ गई हैं, लेकिन बहुत कम लोगो को यह आभास होगा कि उपचुनाव में दावेदारी के बहाने भीमसिंह की नजरें तो 2023 के विधानसभा चुनाव पर है।

दरअसल भीम सिंह को भी भली भांति पता हैं कि इस उपचुनाव में वल्लभनगर में टिकट के लिए कांग्रेस में कोई कितना ही जोर लगा सिंबल का लिफाफा तो पूर्व गृहमंत्री गुलाबसिंह शक्तावत के परिवार के किसी सदस्य के नाम खुलना लगभग तय है, लेकिन इस उपचुनाव के बहाने हो रही उनकी (भीम सिंह) मेहनत 2023 के विधानसभा चुनाव में दावेदारी को और ज्यादा मजबूत बनाने बहुत काम आ सकती हैं। इसी बड़े लक्ष्य को सामने रखकर वे दौड़ भाग करते नजर आ रहें हैं।

आज की मेहनत कल की सफलता की रणनीति

टिकट वितरण से पहले ही शक्तावत परिवार की फूट खुलकर सामने आ गई हैं। एक तरफ दिवंगत विधायक गजेंद्र सिंह की पत्नी प्रीति शक्तावत टिकट के लिए जोर लगाए हुए है, तो दूसरी तरफ गजेंद्र के बड़े भाई देवेंद्र सिंह। ऐसे में इन दोनों में से किसी एक को टिकट मिल भी जाय तो मौजूदा हालात को देखते हुए कांग्रेस को यहां चुनाव जीतने पसीना कोई कम नहीं बहाना पड़ेगा।

तमाम कोशिशों के बावजूद चुनाव परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आते हैं, तो 2023 के चुनाव में भीम सिंह चुंडावत पार्टी नेताओं के सामने यह कहने का मौका भी मिल जाएगा कि उन्होंने तो उप चुनाव में पार्टी हित में टिकट की दौड़ से खुद को बाहर किया, अब तो उनका हक बनता है। माना जा रहा है कि कुछ ऐसी ही रणनीति से भीमसिंह इस उप चुनाव में दावेदारी के नाम इतना पसीना बहाते नजर आ रहे है।

गजेंद्र सिंह के निधन के बाद से ही सक्रिय हो गए

गजेंद्र सिंह के निधन के कुछ दिन बाद ही भीम सिंह ने वल्लभनगर क्षेत्र में डेरा डालना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने शक्तावत के राजनीतिक कुनबे में शामिल कुछ सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ताओ को अपनी टीम में शामिल कर पंचायत स्तर पर बैठके शुरू की। लोगो की समस्या सुनकर समाधान की लालसा जगाई।

गहलोत सरकार के कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला के काफी नजदीकी होने से भीमसिंह ने सबसे पहले क्षेत्र में पेयजल संकट की समस्या से जुड़ी जनता की नब्ज पकड़ी। कुछ जगह सॉलर पनघट लगाने, हैंडपंप खुदवाने से जुड़े कुछ काम करवाकर वोटरों को लुभाने का काम कर दिखाया और धीरे धीरे लोगो को अपनी तरफ खीचना शुरू कर दिया।

मेवल के नाम क्षेत्रीय विकास का दांव भी खेला

भीम सिंह खुद कुराबड़ क्षेत्र के रहने वाले है जो कि वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र में आता हैं। ऐसे में सबसे पहले तो उन्होंने क्षेत्रवाद का दांव खेला कि वल्लभनगर विधानसभा में कुराबड़/मेवल क्षेत्र भी आता है। यह क्षेत्र आज भी पिछड़ा है और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मेवल क्षेत्र को कभी मौका नहीं दिया। इस बार मेवल क्षेत्र को मौका मिले। इसके बाद उन्होंने दावेदारी की गाड़ी आगे बढ़ाई।

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