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वल्लभनगर उपचुनाव : सहानुभूति लहर पर भारी पड़ सकती पारिवारिक फूट

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कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर घमासान

उदयपुर(ARLive news)। इसी साल अप्रैल में तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा को सहानुभूति लहर खूब काम आयी। अब वल्लभनगर में भी कांग्रेस सहानुभूति लहर के भरोसे मैदान में उतरने के मूड में है। लेकिन यहां टिकट वितरण से पहले ही पूर्व गृहमंत्री गुलाबसिंह शक्तावत एवं दिवंगत विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत के परिवार में ही राजनीतिक फूट पड़ने से कांग्रेस को इस सीट पर खूब पसीना बहाना पड़ सकता हैं।

वल्लभनगर में दिवंगत कांग्रेस विधायक गजेंद्र सिंह की पत्नी प्रीति शक्तावत को टिकट मिलने की पूरी संभावना नजर आ रहीं है, लेकिन शक्तावत के बड़े भाई देवेंद्र सिंह शक्तावत ने भी ताल ठोक रखी हैं। वे पिछले दिनों ही उदयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुलकर एलान कर चुके है कि प्रीति को टिकट दिया गया तो वे निर्दलीय चुनाव लड़ने जैसा कदम भी उठा सकते है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में देवेंद्र सिंह ने प्रीति शक्तावत पर खुलकर कई आरोप तक लगाए थे।

भांजा भी मामी प्रीति के साथ नहीं

शक्तावत परिवार का भानजा एवं सुखाड़िया विश्वविद्यालय में केंद्रीय छात्र संघ अध्यक्ष रह चुके राजसिंह झाला भी बड़े मामा (देवेंद्र सिंह ) के साथ खुलकर खड़े नजर आ रहे है। राज सिंह भी मामी प्रीति को टिकट देने के पक्ष में नहीं है। राजसिंह झाला वल्लभनगर में बड़े मामा के साथ अब तक कई बैठकों को भी सम्बोधित कर चुके है।

ऐसे में तीन सीटों के उपचुनाव परिणाम को ध्यान में रखकर कांग्रेस वल्लभनगर में भी सहानुभूति लहर के भरोसे चुनाव जीतने का सपना देख रहीं है तो यहां टिकट वितरण से पहले ही शक्तावत परिवार में पड़ी फूट पार्टी को कहीं न कहीं परेशानी में डाल सकती हैं। वल्लभनगर में कांग्रेस से टिकट लेने भीमसिंह चूंडावत भी दमखम लगाएं हुए है।

अप्रैल 21 के उपचुनाव में ऐसे चली सहानुभूति लहर

इसी साल 2 मई को आये विधानसभा उपचुनाव परिणाम में राजसमंद सीट पर किरण माहेश्वरी की बेटी और भाजपा प्रत्याशी दीप्ति माहेश्वरी ने कांग्रेस के तनसुख वोहरा को हराया। सहाड़ा सीट पर कांग्रेस के दिवंगत विधायक कैलाश त्रिवेदी की पत्नी गायत्री देवी ने जीत दर्ज की जबकि सुजानगढ़ सीट पर पूर्व मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल के पुत्र और कांग्रेस प्रत्याशी मनोज कुमार मेघवाल ने जीत दर्ज की थी। ये तीनो ही पहली बार चुनाव लड़े और तीनों ही विधायक बन गए। इनके विधायक बनने की राह में सहानुभूति की लहर बहुत काम आयी थीं।

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