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कोरोना ने कई बच्चों को किया अनाथ, खरीद-फरोख्त का खतरा बढ़ा: ऐसे बच्चों की पुलिस को सूचना दें और वैधानिक तरीके से ही गोद लें

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जयपुर,(ARLive news)। कोरोना महामारी के चलते देश में हर दिन हजारों लोग दम तोड़ रहे हैं। आंकड़ों में तो मरने वाला एक व्यक्ति होता है, लेकिन उसके पीछे छूटे बच्चे अनाथ हो रहे हैं, जो मौत से कम नहीं है। कोरोना से हर रोज कई बच्चे अनाथ हो रहे है। बच्चों के इस तरह से लावारिस होने से उनकी खरीद-फरोख्त का खतरा भी बढ़ा है। किसी व्यक्ति से संपर्क कर बच्चों को डायरेक्ट गोद लेने के मैसेज भी इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं।

ऐसे में लोगों से भी अपील है कि आपके आस-पास अगर किसी बच्चे ने कोरोना के कारण माता-पिता को खोया है और वह अनाथ है, तो उनके बारे में पुलिस, बाल कल्याण समिति को सूचित करें या हेल्पलाइन 1098 पर काॅल कर बच्चों को सुरक्षित हाथों तक पहुंचाने में प्रशासन की मदद करें।

बच्चों के लिए कार्यरत गैर सरकारी संस्थाएं, एक्टिविस्ट और आमजन भी अनाथ हुए इन बच्चों को वैधानिक तरीके से सहारा देकर उनका जीवन संवार सकते हैं।

बच्चों के खरीद-फरोख्त का खतरा बढ़ा

बाल अधिकारों के लिए कार्यरत संस्था सुरमन की संस्थापक और राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ने बताया कि कोरोना से हर रोज ऐसे कई मामले सामने आ रहे है जिनमे माता—पिता की मृत्यु के बाद उनके बच्चे लावारिस हो रहे है। इन बच्चों को उचित माध्यम से गोद नहीं लिए जाने के कारण कई बार इनकी खरीद—फरोख्त की भी संभावना रहती है।

चतुर्वेदी ने बताया कि देश व राज्य की राजधानी समेत कई बड़े शहरों से प्रतिदिन ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी देकर पूछताछ की जा रही है कि इन बच्चों को गोद लेने का कोई इच्छुक व्यक्ति है..? ऐसे में लोगों से भी अपील है कि आपके आस-पास अगर किसी बच्चे ने कोरोना के कारण माता-पिता को खोया है और वह अनाथ है, तो उनके बारे में पुलिस, बाल कल्याण समिति को सूचित करें या हेल्पलाइन 1098 पर काॅल कर बच्चों को सुरक्षित हाथों तक पहुंचाने में प्रशासन की मदद करें।

वैधानिक प्रक्रिया से लें गोद

मनन चतुर्वेदी ने यह भी बताया कि इन दिनों ऐसे बच्चों को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के गोद लेने के मामले भी सामने आ रहे है, ऐसे में उनकी ऐसे लोगों एवं अभिभावकों से अपील है कि जिला बाल कल्याण समिति के माध्यम से वैधानिक प्रक्रिया अपनाते हुए ही गोद ले, ना कि अपने स्तर पर सीधे ही गोद लेने की कोई प्रक्रिया अपनाएं। बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के बच्चे को डायरेक्ट गोद लेने से गोद लेने वाले दम्पति के साथ—साथ बच्चे बच्चे भी परेशानी में आ सकते हैं।

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