नई दिल्ली,(ARLive news)। कोरोना काल की शुरूआत और देशभर में लगे लाॅकडाउन के बाद कामगारों और श्रमिकों का परिवार सहित सैकड़ों-हजारों मील दूर अपने गांव पहुंचने के लिए शुरू हुए पलायन की तस्वीरों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। लेकिन जिन लोगों ने वो दर्द झेला था, उसकी याद करके भी उनकी रूह कांप जाती है। यही कारण था कि इस बार जैसे ही दिल्ली में 6 दिन के लाॅकडाउन की घोषणा हुई और महाराष्ट्र में लाॅकडाउन जैसी पाबंदियां लागू की गयीं तो कामगारों और श्रमिकों का पलायन शुरू हो गया।
सोमवार रात को दिल्ली के विभिन्न बस अड्डा पर हजारों की संख्या में कामगार-मजदूर अपने सामान पर परिवार के साथ पहुंचने लगे। सभी का एक ही प्रयास था कि कैसे भी बस-ट्रेन, टैक्सी लेकर अपने गांव पहुंच जाएं। हजारों की संख्या में शुरू हुए इस पलायन ने पुरानी दर्दभरी यादों को सभी की आंखों के सामने लाकर खड़ा कर दिया। यही हालात महाराष्ट्र के हैं। जहां कंपलीट लाॅकडाउन के डर से लोगों ने पहले ही पलायन शुरू कर दिया है।
कामगारों ने बताया कि लाॅकडाउन होते ही मालिक ने हालात ठीक नहीं कहकर गांव वापस जाने के लिए कहा दिया। लोग डरे हुए थे। उनका कहना था कि पिछली बार की तरह लाॅकडाउन बढ़ गया और हम फंस गए तो क्या करेंगे। पिछली बार जब भूखे मरने की नौबत आ गयी थी तो पैदल ही निकला पड़ा था। इसलिए अभी ही निकल जाते हैं।

