उदयपुर,(ARLive news)। आयड स्थित ऐतिहासिक गंगुकुंड में बड़ी संख्या में मछलियां की असामयिक मृत्यु हो रही है। मछलियों की असामयिक मृत्यु पर समाजसेवियों और प्रकृतिक प्रेमियों ने चिंता व्यक्त की है।
पर्यावरण विद डॉ. सुनील दुबे ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए मत्स्य विभाग एवं मत्स्य वैज्ञानिकों से संपर्क कर स्थिति का जायजा लेने और मर रही मछलियों को बचाने की कवायद की। मत्स्य वैज्ञानिक एवं सरोवर विज्ञानी डॉ. विनायक दुर्वे ने बताया कि कुंड मे यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा अत्याधिक मात्रा में आहार और आटे की गोलियां डाली जाती है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक खाना खिलाना मछलियों के लिए हानिकारक है। इसके अलावा अनिर्धारित मात्रा और केवल कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन से मछलियों में कब्ज हो जाता है और शेष रहा आहार कुंड मे सड़ने लगता है।
डॉ. दुर्वे ने बताया कि यहाँ पर पानी मे घुलित ओक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिये 1 एचपी की मोटर से पाइप के साथ छिड़काव नोजल लगाना अच्छा है, जिसे विशेष रूप से दोपहर के दौरान चलना चाहिए। यह पानी को प्रसारित करेगा जो अन्यथा स्थिर है क्योंकि कुंड पानी की सतह तक काफी गहरा है और हवा की क्रिया पानी की तह तक नहीं पहुंचती है। यह पंपिंग और छिड़काव दिन में दो बार होना चाहिए।
मतस्यकी महाविद्यालय के प्रयास एवं मत्स्य विभाग उप निदेशक अकील अहमद की सलाह पर शोधार्थि छात्र विकास उज्जैनिय और चाहत सेवक ने कुंड मे लाल दवा और चूने के घोल का छिड़काव कर पानी का उपचार किया। उन्होंने मृत मछलियों व पानी के नमूने भी एकत्रित किये।

