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उदयपुर पुलिस ने 60 लाख रूपए के गुम हुए 360 मोबाइल तलाश कर मालिकों को सौंपे, जिनसे बरामद हुए उनकी होगी जांच

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उदयपुर,(ARLive news)। उदयपुर पुलिस ने अपनी साइबर सेल की मदद से पिछले दो से तीन साल में गुम हुए 360 मोबाइल तलाश कर बरामद किए हैं। आज सोमवार को पुलिस ने मोबाइल मालिकों को पुलिस लाइन बुलाया और उनके मोबाइल सुपुर्द किए। मोबाइल काफी महंगे भी थे, ऐसे में इन 360 मोबाइल की कीमत करीब 60 लाख रूपए आंकी गयी है।

उदयपुर में ऐसा अभियान पहली बार शुरू हुआ है, जब पुलिस गुम हुए मोबाइल की तलाश कर बरामदगी कर रही हो। हालां कि ऐसा ही अभियान 6 महीने पहले जयपुर कमिश्नरेट में चला था, जयपुर पुलिस ने दो महीने मशक्कत कर जून 2020 में 1400 से अधिक मोबाइल बरामद किए थे, तब उदयपुर एसपी राजीव पचार जयपुर नाॅर्थ में डीसीपी थे। ऐसे में माना जा सकता है कि आईपीएस राजीव पचार के उदयपुर एसपी लगने से उदयपुर को जयपुर जैसी एक्टिव और स्मार्ट पुलिसिंग का लाभ मिलेगा।

एसपी राजीव पचार ने बताया कि 10 दिन पहले उदयपुर पुलिस की साइबर सेल को टास्क दिया गया, जिसमें उन्हें पिछले 2 से 3 साल में गुम हुए मोबाइल को ट्रेसआउट करना था। उन्होंने बखूबी अपना काम किया और 10 दिनों में 360 मोबाइल ट्रेस कर संबंधित थाना पुलिस को सूचना दी। थाना पुलिस ने साइबर सेल से प्राप्त सूचना के आधार पर संबंधित स्थान पर दबिश दी और मोबाइल बरामद किया। मोबाइल जिन लोगों से बरामद हुए हैं, उनकी भूमिका की भी जांच की जाएगी।

गिरोह की संलिप्तता की जांच की जा रही है

एडि.एसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा ने बताया कि गुम हुए अधिकतर मोबाइल किसी न किसी व्यक्ति से बरामद हुए हैं। अभी तो मोबाइल उनके मालिकों को लौटाए गए हैं। अधिकतर मामलों में गुमशुदा की रिपोर्ट ही दर्ज थी, ऐसे में ये मोबाइल जिनसे बरामद हुए हैं, उनसे पूछा जाएगा कि उन्हें मोबाइल किससे मिला। पड़ताल में अगर उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला बनता होगा तो मामला दर्ज कर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

जिनसे मोबाइल बरामद हुए उनकी जांच इसलिए है जरूरी

: किसी का मोबाइल चोरी होता है और वह जब थाने में रिपोर्ट देता है, तो अधिकतर थाना पुलिस उसे गुमशुदगी में ही दर्ज करती है। ऐसे में बरामद मोबाइल की जांच हो, तो ग्रे मार्किट और इससे संबंधित गिरोह खुलासा हो सकता है।

: संभव है कि जिनसे मोबाइल बरामद हुआ, उनके साथ भी धोखा हुआ हो। किसी ने फर्जी बिल बनाकर या बेहद कम कीमत में उन्हें ये मोबाइल अपना बताकर बेच दिया हो। ऐसे में इस बात की जांच जरूरी है कि ये मोबाइल किस चैनल से उस व्यक्ति तक पहुंचे।

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