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कोरोना वैक्सीन का ट्रायल : भोपाल में कोवैक्सीन लगने के 9 दिन बाद व्यक्ति की मौत

man dies days after participating in covaxin corona vaccine clinical trial in bhopal madhya pradeshman dies days after participating in covaxin corona vaccine clinical trial in bhopal madhya pradesh

भोपाल,(ARLive news)। कोरोना वैक्सीन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है, भोपाल में कोवैक्सीन (कोरोना वैक्सीन) का पहला डोज दिए जाने के 9 दिन बाद एक व्यक्ति की मौत हो गयी है। यह व्यक्ति मध्यप्रदेश भोपाल के टीला जमालपुरा निवासी 42 वर्षीय दीपक मरावी था। इस केस ने न सिर्फ कोरोना वैक्सीन पर सवाल खड़ा किया है, बल्कि भोपाल में कोरोना वैक्सीन के चल रहे क्लीनिकल ट्रायल में अपनायी जाने वाली प्रक्रिया पर भी प्रश्न चिह्न लगा दिया है।

क्यों कि दीपक मरावी को टीका लगाने के बाद उसे मेडिकल टीम ऑब्जरवेशन में रखती या हर दिन उसके स्वास्थ्य का परीक्षण किया जाता तो शायद वह बच सकता था। मृतक दीपक देहाड़ी मजदूर था और भोपाल के टीला जमालपुरा में एक कमरे के किराए के मकान में पत्नी व 3 बच्चों के साथ रहते थे। दीपक की मौत के बाद परिवार की हालात बेहद खराब हो गयी है।

हालां कि इस संबंध में मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग, सरकार या कोवैक्सीन की कंपनी की ओर से कोई अधिकृत बयान नहीं आया है कि दीपक की मौत किस कारण से हुई। दीपक की मौत वैक्सीन से हुई या मौत का अन्य कोई कारण था..?

मृतक की पत्नी का आरोप वैक्सीन के कारण हुई मौत

दीपक की पत्नी ने बताया कि 12 दिसंबर को उन्होंने कोरोना का वैक्सीन लगवाया था। 7 दिन तो उनका स्वास्थ्य ठीक रहा, लेकिन फिर उनकी तबियत खराब रहने लगी। 21 दिसंबर को उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ी, वे घर पर ही थे कि उनके मुंह से झाग निकलने लगा। हम उन्हें हाॅस्पिटल ले जाते उससे पहले उनकी मौत हो गयी।

पत्नी का आरोप है कि उनके पति दीपक की मौत वैक्सीन लगाने के कारण हुई है। वे पहले पूरी तरह स्वस्थ थे, उन्हें कोई बीमारी नहीं थी और न ही कोई परेशानी थी। दीपक की पत्नी ने बताया उनके टीका लगने के बाद कोई भी टीम उनकी जानकारी लेने नहीं आयी। उनके पास डाॅक्टर का कोई नंबर नहीं था, इससे वे डाॅक्टर से भी संपर्क नहीं कर पाए।

वैक्सीन लगाने से पहले नहीं दी जा रही पूरी जानकारी

इस प्रकरण के बाद यह बात भी सामने आ रही है कि भोपाल में जिन लोगों को कोरोना वैक्सीन के ट्रायल में शामिल किया जा रहा है, उन्हें उसकी पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर क्षेत्रों से लोगों को यह कहकर लाया जा रहा है, कि कोरोना का टीका लगा रहे हैं।लेकिन यह जानकारी नहीं दे रहे हैं, कि यह ट्रायल हो रहा है और इसमें जान का जोखिम भी हो सकता है। टीका लगवाने वाली एक महिला ने बताया कि टीम ने हमसे सिर्फ यह कहा था कि कि कोरोना का टीका लगा रहे हैं। इसके अलावा हमें और कोई जानकारी नहीं दी गयी।

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